उत्तराखंड सरकार कथित लैंड जेहाद के खिलाफ एक बिल लाने जा रही है। आज तक लवजेहाद की भी परिभाषा तय नहीं हुयी लेकिन अब एक वर्ग विशेष को टारगेट करने के लिये तथाकथित लैंड जेहाद के बहाने एक नया कानून बनाने के लिये उत्तराखंड सरकार विचार कर रही है। पर्वतीय राज्य की सरकार से पूछा जाना चाहिये कि क्या अल्पसंख्यक इस देश के के नागरिक नहीं हैं? उनको भी दूसरे धर्मों के लोगों की तरह देश के किसी भी राज्य में ज़मीन खरीदने बसने और कारोबार करने का संविधान ने समान अधिकार नहीं दिया है? अगर कोई अल्पसंख्यक उत्तराखंड में भूमि खरीदता है तो यह लैंड जेहाद कैसे हो गया? दरअसल हिंदू वोट बैंक की राजनीति करते करते अधिकांश भाजपा सरकारों ने झूठ नफरत और भय फैलाने की राजनीति का सहारा लेकर कई बार कई राज्यों की सत्ता में कब्ज़ा जमाया है। इन सरकारों ने मीडिया के ज़रिये एक झूठा नेरेटिव पेश कर बात बात पर लवजेहाद थूकजेहाद और लैंडजेहाद का आरोप लगाकर बहुसंख्यकों में मन में अल्पसंख्कों के लिये एक सोची समझी योजना के तहत डर और घृणा पैदा कर सत्ता हासिल करने का बहाना तलाश लिया है। जबकि यह संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।
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