*किफायत से खर्च करें पानी,*
*वरना हो जायेगी परेशानी...*
एक विद्वान ने कहा है। लोग चीज़ों की वैल्यू मिलने से पहले और उनके खोने के बाद ही समझते हैं। हम लोग जिस पश्चिमी यूपी में रहते हैं। उसको बहुत से वरदान कुदरत ने दिए हैं। उनमें से एक पर्याप्त पानी भी है। यही वजह है इस इलाक़े की खेती अच्छी है। घरों में भी जल निगम नगर निगम और स्थानीय निकाय भरपूर पानी सप्लाई करते हैं। कई शहरों में पानी मामूली टैक्स देकर अनलिमिटेड मिलता है। कुछ लोग इसका इसीलिए दुरूपयोग भी करते हैं। वे पानी भरकर नहीं रखते। टूटी खुली छोड़ देते हैं। पानी बेवजह बहता रहता है। वे पीने के इस पानी से अपने वाहन भी धोते हैं। अपने मकान दुकान के सामने खूब पानी का छिड़काव करते हैं। छतें भी बार बार पानी से धोते हैं। कुछ ने अवैध रूप से पालिका के पानी से व्यवसाय कर पैसा कमाने का रास्ता भी तलाश लिया है। कुछ घर के बाथरूम में घंटों नहाते रहते हैं। कुछ टॉयलेट के फ्लश को शौच के साथ ही पेशाब करने पर भी बार बार चलाते हैं।
कुछ शेविंग करते हुए वाश बेसिन का नल लगातार खुला रखते हैं। आर ओ में भी दो तिहाई पानी बर्बाद होता है। कुछ पानी भरने के लिए मोटर चलाकर भूल जाते हैं और घंटों पानी नाली में बहता रहता है। कुछ गमलों में वेस्ट पानी की जगह पेयजल ही डालते हैं। कुछ लोग छतें ठंडी करने को बहुत पानी रात को खुली हवा में सोने के लिये बर्बाद करते हैं। बर्तन धोने के लिए भी कुछ महिलाएं एक बार टूटी खोलकर तब तक बंद नहीं करती जब तक सब बर्तन नहीं धुल जाते। कुछ घर दुकान और सड़क को साफ करने की जगह सैंकड़ो लीटर पानी रोज़ डालते हैं। ऐसे लोगों से पानी वेस्ट न करने को कहो तो वे कहते हैं, हमारा वाटर कनेक्शन है, हम चाहे जितना पानी बहाएं आपको क्या प्रॉब्लम है। उनको कौन बताए ज़मीन के नीचे से आ रहा पानी उनका नहीं सब नागरिकों का है और लगातार वाटर लेवल नीचे जा रहा है।
*कम लोगों को पता है कि राजस्थान महाराष्ट्र कर्नाटक तमिलनाडु और दिल्ली के कई इलाकों में ज़मीन के नीचे पानी पूरी तरह खत्म हो चुका है। यहां दो से पांच दिन में सरकारी और प्राइवेट टैंकर से पानी आता है। यहां प्रति व्यक्ति 20 से 40 लीटर पानी खरीदा जाता है। जबकि जरूरत 200 से 500 लीटर की होती है। यह पानी एक, डेढ़ से दो रुपए लीटर तक और कहीं कहीं 30 रु बोतल से 160 रु प्रति जार मिलता है। प्रति परिवार को 1500 से 8000 रु पानी के लिए खर्च करने पड़ते हैं। इसलिए आज और अभी से पानी का दुरुपयोग बंद कर दीजिये।*