Wednesday, 11 March 2026

ईरान पर हमला

*बेशक अंत में हार ही जायेगा ईरान, 
लेकिन जंग से होगा सबका नुकसान!* 
      *-इक़बाल हिन्दुस्तानी* 
0 ट्रंप जंग चालू होते ही यह भी कह रहे थे कि ईरान के 85 प्रतिशत हथियार खत्म किये जा चुके हैं। अगर यह बात सही होती तो जंग दो चार दिन में खत्म हो जाती लेकिन ईरान जितनी बहादुरी सुनियोजित और रण्नीतिक तौर पर दस दिन बाद भी पूरी ताकत हिम्मत और आश्चर्यजनक तरीके से लड़कर इतना नुकसान उठाने के बाद भी अमेरिका इस्राइल और पड़ौसी अरब देशों को नुकसान पहुंचा रहा है। उससे ऐसा लगता है कि वह इस जंग को जितना हो सके उतना लंबा खींचने और पूरी दुनिया को अमेरिकी ज़िद गल्ती और दुस्साहस के नुकसान का अहसास कराने का मन बना चुका है। ईरान ने होरमुज जलडमरूमध्य मार्ग बंद कर दुनिया में तेल आने के 20 से 25 प्रतिशत रास्ते को पहले ही बंद कर दिया है।
        अमेरिका ने इस्राइल के दबाव में ईरान पर जंग थोपकर अपना मनमाना तानाशाह और साम्राज्यवादी अभियान आगे बढ़ाया है। उसके पास इस जंग को शुरू करने के कोई वाजिब कारण नहीं है। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने देश के सुपर पाॅवर होने के कारण इस जंग को ईरान ही नहीं अप्रत्यक्ष रूप से पूरी दुनिया पर जबरन थोप दिया है। ट्रंप ने पहले दावा किया कि यह जंग दो चार दिन में जीत लेंगे। लेकिन जब ईरान ने अपने टाॅप मज़हबी सुप्रीमो आयतुल्लाह खामेनई के साथ ही कई बड़े नेता मंत्री और सैनिक कमांडर पहले ही हमले में खोने के बावजूद अमेरिका इस्राइल के हमलों का ज़बरदस्त जवाब देना शुरू किया तो ट्रंप ने ईरानी जनता को भड़काकर सड़क पर आने और अपनी सरकार के खिलाफ विद्रोह के लिये उकसाया। मगर ईरानी लाखों की तादाद में रोड पर तो आये मगर अपनी सरकार और अपने सुप्रीम इस्लामी लीडर खामेनई के पक्ष में उनके लिये शोक मनाने उनको श्रध्दांजलि देने और उनके साथ अपनी एकता ज़ाहिर करने को आये। इसके बाद ट्रंप ने ईराक सीरिया और ईरान के सीमावर्ती कुर्दों को उकसाया कि सब मिलकर बगावत कर दें तो उनको लड़ने के लिये हथियार धन और इस समय अलग देश मिल सकता है। लेकिन ईराक जंग के समय अमेरिका से धोखा खाये कुर्दों ने बाकायदा पत्र लिखकर इस आत्मघाती और धूर्त प्रस्ताव को ठुकरा दिया। इसके बाद ट्रंप ने ईरान के आसपास के अरब मुल्कों को यह कहकर जंग में कूदने के लिये तैयार करना चाहा कि ईरान ने उन पर हमला करके खुद अपनी कब्र खोद ली है। लेकिन एक तरफ ईरान ने यह साफ कर दिया कि उसकी इन पड़ौसी अरब मुल्कों से कोई सीधी दुश्मनी नहीं है। वह तो बस उन अमेरिकी सैनिक अड्डों को निशाना बना रहा है।
        जिस अमेरिका ने उस पर बिना वजह जंग लाद दी है। इसके साथ ही ईरान ने पड़ौसी खाड़ी के देशों में अमेरिकी सैनिक अड्डों पर हमले के दौरान उन मुल्कों उनकी जनता और बुनियादी ढांचों को अनजाने में पहुंचे नुकसान पर अफसोस जताकर आगे से ऐसे हमले करने के दौरान ज़रूरी एहतियात बरतने और भविष्य में उनको निशाना बनाने से बचने का बयान देकर ट्रंप का यह खेल भी खराब कर दिया। इसके साथ ही ट्रंप ने बार बार दावा किया कि जंग का मकसद ईरान में सरकार बदलना है। लेकिन वहां न तो सरकार बदली है और न ही निकट भविष्य में बदलने के आसार नज़र आ रहे हैं। ट्रंप का यह भी कहना था कि ईरान अपना नया धार्मिक सर्वोच्च नेता उनकी सहमति से चुने लेकिन ईरान ने मरहूम खामेनई के बेटे मुजतब खामेनई को उनकी जगह खुद चुनकर ट्रंप के इस दावे की भी हवा निकाल दी। ट्रंप का यह भी कहना था कि वह ईरान के परमाणु केंद्रों को हमेशा के लिये नष्ट कर देंगे लेकिन अभी तक वे ऐसा भी नहीं कर पाये हैं। ट्रंप का यह भी सपना है कि ईरान की बेलेस्टिक मिसाइल ड्रोन और दूसरे घातक हथियारों को जंग शुरू होने के पहले सप्ताह मंें खत्म करके उसकी सैनिक कमर तोड़ दी जाये। लेकिन अब तक ऐसा भी कुछ नहीं हुआ। ट्रंप जंग चालू होते ही यह भी कह रहे थे कि ईरान के 85 प्रतिशत हथियार खत्म किये जा चुके हैं। अगर यह बात सही होती तो जंग दो चार दिन में खत्म हो जाती लेकिन ईरान जितनी बहादुरी सुनियोजित और रण्नीतिक तौर पर दस दिन बाद भी पूरी ताकत हिम्मत और आश्चर्यजनक तरीके से लड़कर इतना नुकसान उठाने के बाद भी अमेरिका इस्राइल और पड़ौसी अरब देशों को नुकसान पहुंचा रहा है। उससे ऐसा लगता है कि वह इस जंग को जितना हो सके उतना लंबा खींचने और पूरी दुनिया को अमेरिकी ज़िद गल्ती और दुस्साहस के नुकसान का अहसास कराने का मन बना चुका है। ईरान ने होरमुज जलडमरूमध्य मार्ग बंद कर दुनिया में तेल आने के 20 से 25 प्रतिशत रास्ते को पहले ही बंद कर दिया है। दूसरी तरफ तेल रिफाइनरीज़ पर हो रहे हमलों से कच्चे तेल के दाम 70 डाॅलर प्रति बैरल से बढ़कर 110 डालर तक पहंुच चुके हैं। क्रूड आॅयल के रेट जंग चलती रही तो जल्दी ही 150 डाॅलर तक पहंुच जाने के आसार बनते जा रहे हैं।
          इससे पूरी दुनिया में न केवल तेल और गैस की कमी होने का खतरा मंडरा रहा है बल्कि आवागमन और यातायात व माल ढुलाई का खर्च बढ़ने से सभी वस्तुओं के दाम बढ़ने से समस्त विश्व में महंगाई का खतरा भी बढ़ गया है। बताते हैं कि ईरान जो मिसाइल और ड्रोन हमले के लिये प्रयोग कर रहा है उनको रोकने के लिये इस्राइल का आयरन डोम आयरन मोम बन गया है और अमेरिका का अधिकतर एंटी मिसाइल सिस्टम पड़ौसी अरब मुल्कों में ईरान ने तबाह कर दिया है जो बचा है उसका खर्च अरबों डाॅलर होने की वजह से अमेरिका को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उधर अमेरिका को अपनी ज़मीन और बड़ी रकम अपनी रक्षा के लिये देने वाले अरब मुल्क ट्रंप से बेहद नाराज़ नज़र आ रहे हैं क्योंकि वह केवल इस्राइल की रक्षा के चक्कर में अरब मुल्कों को उनके हाल पर छोड़कर छिपकर तमाशा देख रहा है। ऐसा लगता है कि ईरान बेशक अमेरिका से यह जंग एक दिन हार जायेगा लेकिन वह तब तक अमेरिका इस्राइल पड़ौसी अरब मुल्कों और पूरी दुनिया के अमेरिकी समर्थकों के साथ न्यूटल देशों को भी जाने अनजाने सीधे या अप्रत्यक्ष तौर पर काफी भारी नुकसान पहुंचाकर ही हथियार डालेगा। लेकिन वियतनाम और अफगानिस्तान में हमला करके मुंह की खाने वाला अमेरिका इस बेशर्मी नाकामी और जगहंसाई से कोई सबक सीखेगा यह कोई दावे से नहीं कह सकता। अलबत्ता ईरान के सुप्रीम मज़हबी लीडर मरहूम अयातुल्लाह खामेनई की कई बातों से असहमत होते हुए भी हम इतना ज़रूर कह सकते हैं कि खामेनई ने ट्रंप के सामने ना झुककर इस्राईल से ब्लैकमेल ना होकर बुज़दिल की तरह बंकर में ना छिपकर मौत सामने देखकर भी निडरता से शहीद होकर अमेरिका इस्राईल और ट्रंप को पूरी दुनिया में बदनाम नाकाम और ज़लील कर खुद को इतिहास में अमर कर लिया है। खामेनई के लिये शायर ने कहा है- मैं यह नहीं कहता कि मेरा सर ना मिलेगा, लेकिन मेरी आंखों में तुझे डर ना मिलेगा।
 *नोट- लेखक नवभारत टाइम्स डाॅटकाम के ब्लाॅगर और पब्लिक आॅब्ज़र्वर अख़बार के चीफ एडिटर हैं।*

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