Monday, 16 February 2026

ए आई का डर

*ए आई यानी आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस से क्यों डरी आई टी कंपनियां ?* 
0 यही वजह है कि जैसे ही यह नया टूल ए आई कंपनी एंथ्रोपिक ने लाॅंच किया खासतौर पर भारतीय तकनीकी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गयी। इतना ही एक सप्ताह के अंदर यह गिरावट फिर से आई और देखते ही देखते 8 दिन में आई टी सैक्टर की कंपनियों को शेयर मार्केट में 6 लाख करोड़ की पूंजी गंवानी पड़ गयी। पहले सास माॅडल यानी सोफ्टवेयर एज़ ए सर्विस पर काम करने वाली कंपनियां यूज़र को टूल देती थी जिसके उपयोग और रखरखाव के एवज़ में कंपनी को मोटी फीस मिलती थी। अब ए आई कंपनी ने इस पुराने माॅडल के वजूद को ही चैलंेज कर दिया हैै। जिसमें ए आई स्वयं साॅफ्टवेयर बनायेगा और उसको चलाते हुए मेंटिनेंस भी खुद ही कर लेगा। अब हालत यह होने जा रही है कि 2021 में प्रोग्रामर तलाश करने पर जो 3000 जाॅब दिखती थीं वे अब मात्र 100 के आसपास सिमटती जा रही हैं।          
     *-इक़बाल हिंदुस्तानी*
      एक कंपनी के टैक्निकल मैनेजर की उसके एक जानकार से हुयी बातचीत आजकल सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। यह बातचीत नये कोडिंग वाले ए आई और एसएएस माॅडल के नाकाम होने को लेकर भारतीय आई टी कंपनियों के अस्तित्व पर मंडरा रहे ख़तरे को लेकर चर्चा का विषय बनी हुयी है। मैनेजर का कहना है कि हमारे देश का आई टी सैक्टर पिछले कई दशक से जिस एसएएएस माॅडल पर काम कर रहा था वह अब बेकार होने जा रहा है। इसकी वजह यह है कि ए आई का नया परिष्कृत रूप अब तरह तरह के कुछ प्रश्नों का उत्तर देने वाला मात्र चैटबाॅट नहीं रह गया है बल्कि वह विशेषज्ञ मानव की तरह ए आई कामगार बन चुका है। मिसाल के तौर पर मैनेजर अपनी अन्य हल्की और आम बातों के साथ जो सबसे गंभीर और आई टी उद्योग की सबसे बड़ी ख़तरे की घंटी की आहट सुनकर बता रहा है वह यह है कि अब ए आई कानूनी मसौदा बहीखाता प्रूफ रीडिंग इंट्रो हैडिंग काॅलम चैकिंग टैस्टिंग और कोडिंग तक का काम मिनटों नहीं सेकंडों में करके दे रहा है। वह किसी भी विषय पर लेख निबंध और रिपोर्ताज तक पलक झपकते ही उपलब्ध करा रहा है। यही वजह है कि इस कंपनी के मैनेजर ने पिछले दिनों 30 साल से काम कर रहे एक अधेड़ वरिष्ठ तकनीकी प्रोग्रामर अधिकारी को इसलिये हटा दिया क्योंकि जो काम वह एक सप्ताह में करता था उसी काम को प्रबंधक ने इंग्लिश में डायरेक्शन देकर ए आई से दस मिनट में उससे भी बेहतर क्वालिटी में करा लिया। मैनेजर का कहना था कि मानव कर्मचारी के साथ बैठक चर्चा अपडेट और दिशा निर्देश देने और फिर उसको क्राॅस चैक करने में समय और पैसा दोनों ही अधिक लगता है।
       वायरल चैट में इस मैनेजर ने सबसे डरावनी बात जो कही वह यह थी कि अगर उनका इतना पुराना अनुभवी और एक्सपर्ट आई टी कर्मचारी अब कंपनी के लिये निशुल्क भी सेवायें देता तो कंपनी स्वीकार नहीं करती क्यांेकि वह जितना समय इस काम में लगायेगा दूसरी उनकी प्रतियोगी कंपनियां ए आई से सेकंडों में काम लेकर उनकी कंपनी को मार्केट में पीछे छोड़ देंगी। यही वजह है कि जैसे ही यह नया टूल ए आई कंपनी एंथ्रोपिक ने लाॅंच किया खासतौर पर भारतीय तकनीकी कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट देखी गयी। इतना ही एक सप्ताह के अंदर यह गिरावट फिर से आई और देखते ही देखते 8 दिन में आई टी सैक्टर की कंपनियों को शेयर मार्केट में 6 लाख करोड़ की पूंजी गंवानी पड़ गयी। इस गिरावट के दौर के आगे भी चलने का खतरा आई टी सैक्टर पर मंडरा रहा है। पहले सास माॅडल यानी सोफ्टवेयर एज़ ए सर्विस पर काम करने वाली कंपनियां यूज़र को टूल देती थी जिसके उपयोग और रखरखाव के एवज़ में कंपनी को मोटी फीस मिलती थी। अब ए आई कंपनी ने इस पुराने माॅडल के वजूद को ही चैलंेज कर दिया हैै। जिसमें ए आई स्वयं साॅफ्टवेयर बनायेगा और उसको चलाते हुए मेंटिनेंस भी खुद ही कर लेगा। अब हालत यह होने जा रही है कि 2021 में प्रोग्रामर तलाश करने पर जो 3000 जाॅब दिखती थीं वे अब मात्र 100 के आसपास सिमटती जा रही हैं। हालांकि जब शुरू शुरू में कंप्यूटर आये थे तब भी नौकरियों को लेकर ऐसा ही खतरा माना जा रहा था लेकिन कुछ जाॅब कंप्यूटर से घटे तो नये जाॅब भी भारी संख्या में पैदा हुए लेकिन ए आई को लेकर कुछ अधिक ही पैनिक है। शायर ने कहा है- *यहां किसी को कोई रास्ता नहीं देता, मुझे गिरा के तुम संभल सको तो चलो।।* 
 *नोट- लेखक नवभारत टाइम्स डाॅटकाम के ब्लाॅगर और पब्लिक आॅब्ज़र्वर अख़बार के चीफ एडिटर हैं।*

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