गृहमंत्री अमित शाह ने आरोप लगाय है कि अपना वोटबैंक बढ़ाने के लिये पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी बंग्लादेश से घुसपैठ करने वालों को बढ़ावा दे रही हैं। उनका यह भी कहना है कि केंद्र सरकार ऐसा किसी कीमत पर नहीं होने देगी। शाह का दावा है कि घुसपैठ की समस्या को जड़ से खत्म करने को उनकी सरकार सुरक्षा ग्रिड बनायेगी। सवाल यह है कि राजनीतिक लाभ के लिये अगर राजनेता एक दूसरे पर इतने गंभीर आरोप लगा सकते हैं तो फिर घुसपैठ की समस्या का वास्तविक समाधान कैसे और कौर करेगा? सबको पता है कि सीमा सुरक्षा का काम सीमा सुरक्षा बल करता है। इस बल की कमान केंद्र सरकार के हाथ में है। क्या यह संभव है कि किसी राज्य की सरकार केंद्र सरकार से छिपाकर अपने राज्य में राजनीतिक लाभ के लिये अवैध लोगों की घुसपैठ कराये और केंद्र सरकार को भनक तक ना लगे। या केंद्र सरकार को इस बात का पता भी हो जैसा कि अमित शाह दावा कर रहे हैं फिर भी वे राज्य सरकार के सामने घुटने टेक दें? दूसरा सवाल यह है कि अगर केंद्र सरकार को पता है कि बंगाल में घुसपैठ हो रही है तो उन्होंने अपने जांच कराकर कितने बंग्लादेशियों को उनके देश वापस भेजा? उनको ऐसा करने से कौन रोक रहा है? जो सुरक्षा ग्रिड शाह अब बनाने की बात कह रहे हैं उस ग्रिड हो अब तक क्यों नहींे बनाया गया? सीमा पर घुसपैठ रोकने की ज़िम्मेदारी आखिर केंद्र सरकार की है तो उनको किससे अनुमति लेनी है? कहीं ऐसा तो नहीं जिस राज्य में भी चुनाव आता है वहां भाजपा मोदी सरकार केंचुआ के साथ मिलकर एक योजना के तहत पहले घुसपैठ का आरोप लगाती हैै और फिर विपक्ष के समर्थक माने जाने वाले वोटों में से एक हिस्से को इस बहाने बड़ी तादाद में काटकर चुनाव जीत लेती है। उसके बाद घुसपैठ के सारे आरोप सारे दावे और सारे वादे भुलाकर अगल राज्य के चुनाव में लग जाते हैं। बिहार में भी यह प्रयोग सफल रहा है। एक शायर ने कहा है-
0 लोगों के सर ऐब को मढ़ना सीख गये,
हम भी बेबात झगड़ना सीख गये।
उड़ना कब सीखेंगे चिड़िया के बच्चे,
सांप के बच्चे पेड़ पर चढ़ना सीख गये।।
नोट- लेखक नवभारत टाइम्स डाॅटकाम के ब्लाॅगर और पब्लिक आॅब्ज़र्वर अख़बार के चीफ़ एडिटर हैं।
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