*नजीबाबाद में होली मिलन ईद मिलन नरेश चंद जी का सराहनीय कदम था...* जे पी गुप्ता, पूर्व उपजिलाधिकारी
जो भरा नहीं है भावों से बहती जिसमें रसधार नहीं
वह हृदय नहीं है पत्थर है जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं
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जीवन जब राष्ट्रीयता से ओतप्रोत होती है तब वह धर्म जाति संप्रदाय इन बंधनों को तोड़कर आगे बढ़ जाती है. ऐसे ही एक शख्स की याद आज ताज़ा हो गई जिसका नाम है इक़बाल हिंदुस्तानी और ठिकाना है नजीबाबाद उत्तरप्रदेश. इस शख्स का वास्तविक नाम इक़बाल अहमद शेख था पर हिंदुस्तान की आत्मा को अपनी आत्मा में बसाकर वह व्यक्ति इक़बाल हिंदुस्तानी हो गया और यही नाम सभी रेकार्ड में दर्ज करा लिया.मुझे याद है कि नजीबाबाद की खूबसूरत धरती पर होली व ईद की मौके पर सांप्रदायिक सौहार्द को ध्यान में रखते हुए एक बहुत ही खूबसूरत परंपरा स्व. श्री नरेश अग्रवाल जी द्वारा शुरू कि गई थी जो लगातार वहां पर निभाई जा रही थी. जिसमें होली के त्योहार पर होली मिलन का कार्यक्रम मुस्लिम समाज द्वारा और ईद की त्यौहार पर ईद मिलन कार्यक्रम हिंदू समाज द्वारा आयोजित किया जाता था. संजोग बस मुझे भी प्रशासक के रूप में वहां कार्य करने का अवसर मिला. हिंदू लोगों द्वारा ईद मिलन का सुंदर कार्यक्रम आयोजित किया जाता था और होली के अवसर पर होली मिलन कार्यक्रम मुस्लिम लोगों द्वारा. अपने कार्यकाल की दौरान ईद मिलन कार्यक्रम का सुन्दर आयोजन में मुख्य अतिथि की रूप में शिरकत करने का मौका मिला और उसके बाद होली मिलन कार्यक्रम जिसमें मुशायरा का कार्यक्रम होता था.होली मिलन कार्यक्रम की रूपरेखा देखकर मैंने कहा कि इसमें केवल मुशायरा ना होकर होली के गीत आदि भी शामिल किए जाने चाहिए तो आयोजन में शामिल कुछ लोगों द्वारा कहा गया की मुशायरा के साथ संगीत का कार्यक्रम करने से मुस्लिम समाज नाराज हो सकता है क्योकि मुआहरा मे अदब का एक अलग स्थान है.. मैंने देखा कि कुछ आयोजक तो इतना डर गए की कार्यक्रम की शुरुवात में वो मंच पर आने से कतराते रहे. ऐसे में इकबाल हिंदुस्तानी की हिम्मत देखने के काबिल थी. उन्होंने कहा कि मैं एसडीएम साहब के इस प्रस्ताव से बिल्कुल सहमत हूं और इसके लिए उन्होंने बहुत खूबसूरत प्लान किया.होली मिलन में कार्यक्रम का आगाज मुशायरे से किया गया और बीच-बीच में इस बात का अनाउंस करते रहे कि होली मिलन में खुद प्रशाशक साहेब होली गीत प्रस्तुत करेंगे तथा सनव्वर अली खान साहब संगीत पर प्रशासक साहेब कि लिखी गजल पेश करेंगे. धीरे-धीरे लोगों के अंदर उत्साह इस कदर बढ़ता गया कि उन्होंने आगे मुशायरा सुनने से पहले होली गीत सुनने की मांग कर दी और वह कार्यक्रम इतना जबरदस्त सफल हुआ जिसमें हिंदू मुस्लिम सभी लोग मिलकर खूब झूमे और नाचे. यहाँ तक कि मंच पर नोटों की बौछार भी कर दी. श्री नरेश अग्रवाल जी के उसे रोपे गए पौधे को सदा के लिए हरा भरा रखने के उद्देश्य से मैंने यह भी प्रस्ताव रखा था कि उक्त कार्यक्रम आगे नगर पालिका परिषद द्वारा कराया जा सकता है ताकि कार्यक्रम कभी वंद ना हो. आज जब पता चला कि अब होली मिलन का वो कार्यक्रम बंद हो चूका है तो पुरानी याद याद ताजा हो गई.
सांप्रदायिक सौहार्द पर आधारित उस कार्यक्रम को क्यों बंद किया गया यह तो पता नहीं लेकिन मुझे लगता है कि वर्तमान कमिश्नर आदरणीय श्री aanjaney कुमार सिंह जी से अगर लोग मुलाकात करें और उसके इतिहास से अवगत कराएं तो शायद फिर एक बार होली मिलन और ईद मिलन का कार्यक्रम गुलजार हो सकता है.
वर्ष 2011-2012 में होली मिलन कार्यक्रम की निजामत करते हुए मेरे मित्र इकबाल हिंदुस्तानी जी चित्र में देखे जा सकते हैं।
*नजीबाबाद में उपजिलाधिकारी रहे और कवि श्री जे पी गुप्ता की फेसबुक वॉल से*
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