वामपंथियों की जगह कांग्रेस लेगी अब...
2025 में आरएसएस के साथ ही भारत की कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना के भी 100 साल पूरे हो गये। लेकिन जिस तरह से संघ ने अपनी स्थापना का शतक पूरा होने पर थोड़ा सा जश्न मनाया, वामपंथियों ने इस तरह के भी किसी समारोह की औपचारिकता नहीं की। हालांकि दोनों के वर्तमान हालात में ज़मीन आसमान का अंतर है। एक ओर संघ और जिसके राजनीतिक घटक जनसंघ को कभी राजनीति में अछूत माना जाता था। वह आज केंद्र सहित अनेक राज्यों में सत्ता में है। एक तरह से संघ का स्वर्णिम काल चल रहा है। दूसरी तरफ एक समय 2004 में जिस कम्युनिस्ट पार्टी के संसद में 65 सांसद हुआ करते थे और बंगाल केरल व त्रिपुरा में अपनी सरकार हुआ करती थी। आज उन वामपंथियों के मात्र 9 सांसद हैं। अब किसी भी राज्य में उनकी अपनी सरकार नहीं है। यहां तक कि यूपी बिहार सहित कई राज्यों में उनके कई एमपी और दर्जनों विधायक भी नहीं बचे हैं। अगर कहीं किसी सेकुलर गठबंधन के साथ जुड़कर उनके चंद एमएलए चुने भी गये हंै तो उनको उंगलियों पर गिना जा सकता है। इसकी वजह यह है कि हमारे भारतीय समाज में जिस तरह से धर्म और जाति के आधार पर पंूजीवादी शक्तियों ने अपनी सियासी चालें चलीं और चुनाव लड़ना जीतना और सत्ता में आकर काॅरपोरेट के पक्ष में काम कर उनसे मोटा चंदा लेकर फिर से बार बार चुनाव जीतना बेहद महंगा कर दिया उससे वामपंथी सत्ता से दूर होते चले गये। लेकिन संतोष की बात यह है कि जहां भाजपा जैसी दक्षिणपंथी पार्टी मज़बूत हुयी और लगातार तीन बार से चुनाव जीतकर सत्ता में बनी हुयी है। वहां कांग्रेस ने आम आदमी पार्टी की तरह वामपंथी रास्ता पकड़ लिया है। यह तय है कि आज नहीं तो कल लोग जब भी सत्ता बदलने का मन बनायेंगे वे भाजपा को त्यागकर कांग्रेस के पास ही जायेंगे। यही वजह है कि मोदी बीजेपी और संघ का सारा डर सारा विरोध और दिन रात नेहरू पर आरोप कांग्रेस को सत्ता में आने से रोकने को उन राज्यों में भी लगाये जाते हैं जहां कांग्रेस का नाम ओ निशान भी नहीं बचा है। आज भी अखिल भारतीय स्तर पर विचारधारा वाली कांग्रेस अकेली पार्टी है जिसका संगठन समर्थन और थोड़ा बहुत प्रभाव भारत के हर हिस्से में है। एक शायर ने कहा है-
0 ये लोग औरों के दुख जीने निकल आये हैं सड़कों पर,
अगर सिर्फ अपना ही ग़म होता तो यूं धरने नहीं देते।।
नोट- लेखक नवभारत टाइम्स डाॅटकाम के ब्लाॅगर और पब्लिक आॅब्ज़र्वर अख़बार के चीफ़ एडिटर हैं।
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