0 इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर दीपक के फाॅलोवर 1500 से बढ़कर पांच लाख से अधिक हो चुके हैं। इतना ही नहीं उसका साथ देने वाले उसके दोस्त विजय रावत का भी पूरे देश में डंका बज रहा है। इससे पहले उत्तराखंड में ही शैला नेगी ने एक अल्पसंख्यक पर रेप का आरोप लगने पर उस क्षेत्र के अन्य मुस्लिम दुकानदारों को भगाये जाने का कड़ा विरोध किया था। यूपी के मथुरा ज़िले के नौझील कस्बे में सरकारी पाठशाला के हेड मास्टर जान मुहम्मद पर एक प्रधान ने झूठे आरोप लगाये थे। जिस पर बीएसए ने उनको तत्काल सस्पैंड कर दिया था। लेकिन उनके क्षेत्र के सैंकड़ों हिंदू छात्रों और अभिभावकों ने जोरदार प्रदर्शन कर उनको तत्काल बहाल करा दिया। ऐसा लगता है कि अब खुद हिंदू जनता का वह बड़ा हिस्सा सामने आने लगा है जो इस तरह की घटिया सियासत से तंग आ चुका है।
*-इक़बाल हिंदुस्तानी*
उत्तराखंड के कोटद्वार में 70 साल के एक बुजुर्ग वकील अहमद की कपड़े की दुकान का नाम बाबा स्कूल ड्रेस एंड यूनिफाॅर्म है। यह दुकान लगभग चार दशक से इसी नाम पर चल रही है। बताया जाता है कि इसका शाॅप एक्ट इनकम टैक्स और जीएसटी एक्ट आदि कई कानूनों में इसी नाम से बहुत समय पहले से रजिस्ट्रेशन चला आ रहा है। आज तक शासन प्रशासन या पुलिस को इस नाम से दुकान चलाने की कोई शिकायत किसी से नहीं मिली। कोई और आरोप अपराध या कर चोरी का मामला भी इस दुकान स्वामी के नाम पर दर्ज नहीं है। लेकिन कुछ दिन पहले कुछ नफरती चिंटू बाबा शाॅप पर बिना बुलाये मेहमान के तौर पर जा धमके। उन्होंने वरिष्ठ नागरिक वकील अहमद को धमकाया कि अपनी दुकान के नाम से बाबा शब्द हटायंे। वकील अहमद ने वजह पूछी तो दर्जन भर उत्पाती युवक अभद्रता और अपमान पर उतर आये। यह सब होता देख उधर से जा रहे एक ज़िम्मेदार नागरिक आपसी भाईचारे में विश्वास रखने वाले और कानून का सम्मान करने वाले जिम संचालक दीपक कश्यप उर्फ मुहम्मद दीपक ने हिम्मत दिखाते हुए मामले में हस्तक्षेप करते हुए बुजुर्ग का बचाव किया।
दीपक ने यह जानते हुए भी कि जिनसे वह भिड़ने जा रहा है वे कोई साधारण लोग नहीं बल्कि सत्ताधारी दल के समर्थक शासन प्रशासन व पुलिस की शह पर उत्पात करने वाले लंपट हैं, यह कहते हुए बुजुर्ग का बचाव किया कि यह देश संविधान कानून और आपसी प्यार मुहब्बत से चलता है। दुकान के नाम से बाबा शब्द नहीं हटेगा। न ही दुकान के मालिक को दुकान या घर छोड़कर राज्य व कस्बे से जाने दिया जायेगा। इस पर उत्पाती युवक दीपक से भिड़ गये लेकिन वे उस समय उसका बहुत कुछ नहीं बिगाड़ पाये। बाद में उन उग्र युवकों के खिलाफ मजबूरी में मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने के कारण पुलिस को केस दर्ज करना पड़ा, लेकिन साथ साथ मेल मिलाप और भाईचारा बनाये रखने की कोशिश करने वाले दीपक को भी केस में लपेट लिया गया। इसके बाद जब यह घटना चर्चा का विषय बन गयी तो पुलिस प्रशासन ने कोटद्वार में बाहर से बड़ी तादाद में आकर घटना को कवर करने वाले सोशल मीडिया एक्टिविस्ट यू ट्यूबर्स और बड़े मीडिया हाउसों को प्रवेश से रोक दिया। लकिन तब तक दीपक सोशल मीडिया पर हीरो बन चुका था।
इस घटना के बाद आज दीपक के फाॅलोवर 1500 से बढ़कर पांच लाख से अधिक हो चुके हैं। इतना ही नहीं उसका साथ देने वाले उसके दोस्त विजय रावत का भी पूरे देश में डंका बज रहा है। इससे पहले उत्तराखंड में ही शैला नेगी ने एक अल्पसंख्यक पर रेप का आरोप लगने पर उस क्षेत्र के अन्य मुस्लिम दुकानदारों को भगाये जाने का कड़ा विरोध किया था। यूपी के मथुरा ज़िले के नौझील कस्बे में सरकारी पाठशाला के हेड मास्टर जान मुहम्मद पर एक प्रधान ने झूठे आरोप लगाये थे। जिस पर बीएसए ने उनको तत्काल सस्पैंड कर दिया था। लेकिन उनके क्षेत्र के सैंकड़ों हिंदू छात्रों और अभिभावकों ने जोरदार प्रदर्शन कर उनको तत्काल बहाल करा दिया। ऐसा लगता है कि अब खुद हिंदू जनता का वह बड़ा हिस्सा सामने आने लगा है जो इस तरह की घटिया सियासत से तंग आ चुका है। वह चाहता है कि बढ़ते अपराध महंगाई और बेरोज़गारी जैसे वास्तविक मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिये। दीपक जैसे लोगों के लिये शायर ने क्या खूब कहा है- *दुआ करो कि सलामत रहे मेरी हिम्मत, ये एक चराग़ कई आंधियों पे भारी है।*
*नोट- लेखक नवभारत टाइम्स डाॅटकाम के ब्लाॅगर और पब्लिक आॅब्ज़र्वर अख़बार के चीफ एडिटर हैं।*