Friday, 11 September 2026

रिश्तों में धोखा

*रिश्तों में धोखा बदला और ब्लैकमेल का क्या काम है?*
               *इक़बाल हिंदुस्तानी*
         इलाहाबाद हाईकोर्ट के साथ ही सुप्रीम कोर्ट भी कई बार कह चुका है कि कुछ लोग एक दूसरे से प्यार करते हैं, सेक्स करते हैं और फिर जब किसी बात पर रिश्ते खराब हो जाते हैं तो रेप का केस दर्ज कराकर अपने प्रेमी को जेल भेजने के लिए अदालत में चले आते हैं। कोर्ट ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि सब मुकदमों में ऐसा नहीं होता लेकिन दहेज़ एक्ट की तरह शादी से पीछे हटने पर अकसर ऐसे फ़र्ज़ी मामले सामने आ रहे हैं।
         वास्तव में यह एक नया ट्रेंड है। लड़के लड़की आपस में प्यार करते हैं। साथ घूमते फिरते हैं। खाते पीते हैं। कुछ लिव इन रिलेशन में भी रहने लगते हैं। इस दौरान नज़दीकी और खुलापन बढ़ने पर वे शादी से पहले ही जिस्मानी रिश्ते भी बना लेते हैं। आम तौर पर प्रेमी प्रेमिका से ऐसा करने से पहले शादी का वायदा करता है लेकिन एक दूसरे से मन भर जाने और किसी बात पर मतभेद हो जाने पर दूरियां बढ़ने लगती हैं। इसके बाद कुछ मामलों में लड़की लड़के को ब्लैक मेल भी करती है। कुछ लड़के भी लड़की को बदनाम करने का डर दिखाकर उसको धोखा देते हैं। अगर वह शिकायत करने की बात कहती है तो लड़का उसको बदनाम करने की धमकी देता है। कुछ प्रेमिकाएं गिफ्ट पैसा और दूसरी मांग करती रहती हैं। कुछ के बीच सब कुछ ठीक चलता रहता है लेकिन जब लड़की अचानक प्रेग्नेंट हो जाती है तब विवाद शुरू होता है। लड़का एबॉर्शन पर ज़ोर देता है। जबकि लड़की शादी की ज़िद पकड़ लेती है। कुछ केस ऐसे भी होते हैं जिनमें लड़का पहले से ही शादी कर चुका होता है और पोल खुल जाने के डर से लड़की से दूरी बनाने लगता है। ऐसे में लड़की ठगा सा महसूस करती है। लेकिन वह जानती है उसके सच बताने पर उसका परिवार समाज और कोर्ट उसको ही ग़लत बताएंगे। जबकि पुरुष प्रधान समाज में लड़के की बराबर ग़लती होने पर भी लड़के को इतना बुरा नहीं समझा जाता है। ऐसे केस होने के बाद भी उसकी शादी आराम से हो जाती है। उधर धोखे की शिकार लड़की की न केवल शादी होनी मुश्किल हो जाती है, उसकी दूसरी बहन का रिश्ता भी कठिन हो जाता है। कई बार लगा हुआ रिश्ता भी टूट जाता है। पूरे परिवार को बदनामी और शर्मिंदगी का सामना करना होता है।
        ऐसे मामलों में एक और प्रॉब्लम आती है। कोर्ट में जब केस जाता है लड़की अपने आरोपों को साबित नहीं कर पाती। इसकी वजह यह होती है कि न तो वे किसी रजिस्टर्ड एग्रीमेंट के बाद रिश्ता बनाते हैं न ही उनके अंतरंग रिश्ते का कोई गवाह होता है। ऐसा होना स्वाभाविक भी नहीं है क्योंकि प्यार इश्क और डेटिंग ये सब बातें छिपकर ही की जाती हैं। हालांकि कुछ राज्य सरकारों ने अपने एजेंडे के तहत विपरीत जाति व धर्म के जोड़ों को ऐसा करने से रोकने को लिव इन रिलेशन के लिए रजिस्ट्रेशन ज़रूरी किया है, लेकिन ये लोग समाज और सरकार की नज़र से बचने को रजिस्ट्रेशन कराते ही नहीं हैं। कोर्ट की यह चिंता वाजिब है कि आप अपनी मर्ज़ी से साथ रहते हैं प्यार करते हैं और शारीरिक संबंध भी बनाते हैं लेकिन विवाद होने पर बलात्कार का आरोप लगाकर ब्लैकमेल करते हैं। सवाल यह है कि आपकी गलती नादानी और बचकानेपन की मूर्खता में अदालत अपना बेशकीमती टाइम ख़राब क्यों करे? 
*मकतब ए इश्क का दस्तूर निराला देखा, उसको छुट्टी न मिली जिसने सबक़ याद किया।*
नोट- लेखक नवभारत टाइम्स डॉट कॉम के ब्लॉगर हैं।

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