Friday, 11 September 2026

38 साल से नहीं हटा अतिक्रमण

#इस_तरह_के_अतिक्रमण_को_कोई_38_साल_से_नहीं_हटा_रहा...
          नजीबाबाद के कई मोहल्लों में कल किसी काम से पैदल घूमने का मौक़ा मिला। कई सड़कों पर लोगों ने पूरी बेशर्मी और निडरता से अवैध कब्ज़ा कर रखा है। लगभग सभी पालिकाएं शासन के निर्देश पर कभी कभी मुख्य मार्गों पर अतिक्रमण हटाने का औपचारिक अभियान चलाकर अपने कर्तव्य की अतिश्री कर लेती है।कोई भी स्थानीय निकाय न तो आगे यह देखती है कि नया अतिक्रमण नहीं हो न ही पुराने हटाए गए अतिक्रमण को फिर से होने से रोकने को कोई तंत्र बनाते हैं। यूपी में 1988 से सुपरसीड किए हुए स्थानीय निकायों में चुनाव फिर से होने शुरू हुए थे। आशा थी कि अफसरों के मुकाबले जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों से जनता को अधिक राहत मिलेगी क्योंकि वे उनके बीच से चुनकर आएंगे तो उनकी बात को बेहतर समझेंगे। कुछ मामलों में ऐसा हुआ भी लेकिन सभी स्थानीय लोगों को नाराज़ नहीं करने की नीति से यह भी हुआ कि वे सख़्ती से अतिक्रमण नहीं हटा सके। कुछ लोगों ने अपने घर दुकान और ऑफिसों के सामने नाले नाली नहीं बनने दी। अगर पहले से बनी हुई थी तो उनको पाट दिया। इसके पीछे सार्वजनिक सड़क निजी उपयोग के लिए कब्जाने की नीयत थी। दरअसल नाली ही वो सीमा रेखा है जो अतिक्रमण की सबसे पहले पोल खोल देती है। कई सड़कें खुद बता रही हैं कि वे इधर 15 फिट थी तो उधर 10 फिट रह गई , फिर आगे 12 फिट हो गई यानी जिसका जितना मन हुआ उसने उतनी दबा ली। अजीब बात यह है जब पालिका नई सड़क बनाने आई तो उसने जितनी सड़क बची थी उतनी ही बना दी, अतिक्रमण नहीं हटाया। इससे कई जगह पानी की निकासी भी रुक गया। कई मोहल्लों में भारी जलभराव शुरू हो गया जो आज तक जारी है। कई नालों को पाटकर दुकानदारों ने अपने सामने की सड़क की तरफ पानी का रुख कर दिया। पालिका फिर भी नहीं बोली। फिर इनमें से कुछ ने कई पालिका के नाले की कब्ज़ाई जगह कई हज़ार किराए पर दे दी। नगर में कई जगह लोगों की अपनी दुकान की जितनी गहराई है, उससे ज़्यादा उन्होंने सड़क पर स्थायी और फ्लेक्स बोर्ड या दुकान का सामान रखकर अस्थायी अतिक्रमण कर रखा है। एक सड़क तो साफ़ बता रही है कि उसको अवैध कब्ज़ा करके आधा कर दिया गया है...हिंदुस्तानी

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