Saturday, 1 August 2026

ए सी कोच में चोरी

*ए सी कोच में सफ़र करने वाले भी चोरी करते हैं?*
                  *_इक़बाल हिंदुस्तानी*
               एक अंग्रेज़ी दैनिक की ख़बर के मुताबिक रेलवे के ए सी कोच में सफ़र करने वाले यात्रियों ने पिछले चार साल में 104.51 करोड़ के सामान की चोरी की है। इनमें जनवरी 22 से मई 26 के बीच 1.27 करोड़ बेड रोल, 46.54 लाख फेस टॉवल, 41.13 लाख बेडशीट 12.95 लाख कम्बल व 2.76 लाख तकिए शामिल हैं। हालांकि चोरी की यह रकम रेलवे के अटेंडेंट की सैलरी से हर माह कट जाती है, जिससे रेलवे को कोई नुकसान नहीं हुआ है। हो सकता है इस चोरी में कुछ बाहरी लोग भी शामिल हों लेकिन सवाल यह है कि रेलवे के ए सी कोच में अमीर और मीडियम क्लास लोग ही अधिक यात्रा करते हैं। वे भी चोरी करते हैं?
        आमतौर पर हमारा समाज गरीबों को चोर समझता है। इसकी वजह उनकी आय कम होने से ज़रूरी खर्च पूरे नहीं होना माना जाता है। कुछ लोग उनको नाकारा बताकर भी शॉर्ट कट से पैसा बनाने के आरोप में चोर बता देते हैं। जबकि ग़रीब, अमीर और मीडियम क्लास को पेट भरा होने के बावजूद चोरी करने वाला बताता है। उसका कहना है कि ये वर्ग टैक्स चुराकर ही अमीर बनता है। वे इस वर्ग पर बैंकों का पैसा मारकर दिवालिया बनने से सरकार यानी जनता का धन चुराने का आरोप लगाते हैं। *जबकि सच यह है कि सभी वर्गों में आपको अच्छे बुरे लोग मिल जाएंगे। इसे यह भी कह सकते हैं कि ईमानदार केवल वो है जिसे चोरी का मौक़ा नहीं मिलता है। लेकिन यह भी आधा सच है क्योंकि आपको ऐसे लोग भी सभी क्लास में मिल जायेंगे जो मौक़ा मिलने पर भी कभी चोरी नहीं करते।* 
       इतना ही नहीं आपको कम ही सही आज के कलयुग में भी ऐसे चुनिंदा लोग मिल जाएंगे जिनकी नीयत दूसरे के लाखों करोड़ों रूपये देखकर भी नहीं बिगड़ती। वे किसी का खोया पर्स ज्वैलरी और नोटों का बैग मिलने पर उसे तलाश करके वापस कर देते हैं। जहां तक रेलवे से बिस्तर चादर तकिये और तौलिया चोरी होने का सवाल है, करोड़ो लोग हर साल ए सी ट्रेन में सफ़र करते हैं लेकिन उनमें से 98 से 99% लोग कोई चोरी नहीं करते। लेकिन जो एक दो प्रतिशत चोरी करते हैं, उससे कहा जा सकता है। एक मछली ही तालाब को गंदा करने को काफ़ी है। रेलवे को चाहिए ये सामान देने से पहले लोगों से सिक्योरिटी जमा कराए। लोग खुद सामान वापस देने के लिए उतावले रहा करेंगे। दूसरा तरीका यह हो सकता है कि हर कोच में कैमरे लगाए जाएं जिससे चोरी करने वालों को न सिर्फ़ पहचाना जा सके बल्कि पकड़ा जा सके और उनसे सामान के साथ भारी जुर्माना और उनको जेल भी भेजा जा सके। 
      *संस्कार ज़मीर और ईमान वाले लोग तो बहुत कम होते हैं जो मौक़ा मिलने पर चोरी धोखा और बे ईमानी नहीं करते वरना पूरी दुनिया में इंसान लगभग एक जैसे ही होते हैं। उनमें लालच झूठ और बे ईमानी मौजूद होती है लेकिन सरकार का सिस्टम मज़बूत हो तो उनको पकड़ लेता है, जिससे वे डरकर अपराध नहीं करते।* मिसाल के तौर पर भारतीय रेलवे में लोग खूब बिना टिकट चलते हैं, लेकिन दिल्ली मेट्रो में चाहकर भी ऐसा नहीं कर सकते हैं क्योंकि वहां ऐसा करने का सिस्टम ही नहीं है।

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