Sunday, 5 July 2015

FIR

एफआईआर में क्या क्या होता है ?

अभियुक्त का नाम और पता हो
अपराध होने का दिन,स्थान तथा समय हो
अपराध करने का तरीका तथा उसके पीछे नीयत आदि हो
साक्षी का परिचय हो
अपराध से सम्बद्ध सभी विशेषताएं हों
परिवाद क्या है?

किन्ही व्यक्ति या व्यक्तियों (जानकार या अनजान) के विरुद्ध मौखिक या लिखित रुप में मजिस्ट्रेट को किया गया आरोप है ताकि मजिस्ट्रेट उनके विरुद्ध  विधिक कार्यवाही कर सकें।
जब पुलिस अधिकारी एफआईआर के आधार पर कार्यवाही नहीं करता है, तब व्यथित व्यक्ति उस मजिस्ट्रेट को परिवाद कर सकता है , जिसे उस अपराध पर संज्ञान लेने की अधिकारिता है ।
परिवाद के विषय वस्तु

कथित अपराध का विवरण हो
अभियुक्त तथा परिवादी का नाम तथा पता हो
साक्षियों के नाम तथा पते हों
आत्मरक्षा का अधिकार क्या है ?

हर व्यक्ति को आईपीसी की धारा 96 से लेकर धारा 106 द्वारा दिए गए अधिकार हैं कि वह अपने अथवा अन्य व्यक्ति के शरीर या संपत्ति की अन्य व्यक्ति अथवा व्यक्ति समूह के हमले से रक्षा करे।
गिरफ्तारी के कानून

पुलिस किसी भी व्यक्ति पर अपराध का आरोप होने पर ही उसे गिरफ्तार कर सकती है । केवल शिकायत अथवा शक के आधार पर किसी को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है ।

वारंट क्या है ?

वारंट न्यायालय द्वारा जारी किया गया तथा न्यायालय के पीठासीन अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित एक लिखित आदेश है।
हर वारंट तब तक प्रवर्तन में रहेगा जब तक वह उसे जारी करने वाले न्यायालय द्वारा रद्द नहीं कर दिया जाता या जब तक वह निष्पादित नहीं कर दिया जाता है ।
जमानती वारंट क्या है?

जमानती वारंट न्यायालय द्वारा किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए जारी किया गया वारंट है, जिसमें यह पृष्ठांकित है कि जमानत की शर्तें पूरी करने के बाद उसे जमानत दी जा सकती है । इस मामले में पुलिस जमानत देने की हकदार है , अगर गिरफ्तार व्यक्ति शर्तें पूरी करे।
गैरजमानती वारंट क्या है ?

गैरजमानती वारंट किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए न्यायालय द्वारा जारी वारंट है । इस मामले में पुलिस अधिकारी जमानत देने के लिए प्राधिकृत नहीं है । जमानत प्राप्त करने के लिए गिरफ्तार व्यक्ति को सम्बद्ध न्यायालय में आवेदन करना होगा।
बिना वारंट के गिरफ्तारी

अभियुक्त पर संज्ञेय अभियोग हो या उसके खिलाफ ठोस शिकायत की गयी या ठोस जानकारी मिली हो या अपराध में उसके शामिल होने का ठोस शक हो,
अभियुक्त के पास सेंध लगाने का कोई औजार पकड़ा जाए और वह ऐसे औजार के अपने पास होने का समुचित कारण नहीं बता सके,
अभियुक्त के पास ऐसा सामान हो जिसे चोरी का समझा जाने के कारण हो अथवा जिस व्यक्ति पर चोरी करने या चोरी के माल खरीद-फरोख्त करने का शक करना वाजिब लगे।
अभियुक्त घोषित अपराधी हो ,
अभियुक्त किसी पुलिस अधिकारी के कर्तव्य पालन में बाधा पहुंचाए,
अभियुक्त पुलिस/कानूनी हिरासत से फरार हो जाए,
अभियुक्त के खिलाफ पक्का संदेह हो कि वह सेना का भगोड़ा है,
अभियुक्त छोड़ा गया अपराधी हो, लेकिन उसने फिर कानून तोड़ा हो,
अभियुक्त संदेहास्पद चाल-चलन का हो या आदतन अपराध करने वाला हो,
अभियुक्त पर असंज्ञेय अभियोग हो और वह अपना नाम-पता नहीं बता रहा हो।
 

गिरफ्तारी के लिए मजिस्ट्रेट का वारंट

व्यक्ति को किसी भी मामले में गिरफ्तार करने के दौरान उसका अपराध तथा गिरफ्तारी का आधार बताया जाना चाहिए।
उसे यह भी बताया जाना चाहिए कि उस अभियोग पर उसे जमानत पर छोड़ा जा सकता है या नहीं ।
गिरफ्तारी के समय व्यक्ति पुलिस से वकील की मदद लेने की इजाजत मांग सकता है । उसके मित्र, संबंधी भी उसके साथ थाने तक जा सकते हैं ।
अगर व्यक्ति गिरफ्तारी का प्रतिरोध नहीं कर रहा हो तो गिरफ्तारी के समय पुलिस उससे दुर्व्यवहार नहीं कर सकती है, ना ही मारपीट कर सकती है ।
अगर वह पुराना अपराधी नहीं है या उसके हथकड़ी नहीं लगाने पर भाग जाने का खतरा नहीं है , तो गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति को हथकड़ी नहीं पहनाई जा सकती है ।
अगर किसी महिला को गिरफ्तार किया जाना है , तो पुलिस का सिपाही उसे छू तक नहीं सकता है ।
गिरफ्तारी के तुरंत बाद व्यक्ति को थाने के प्रभारी अथवा मजिस्ट्रेट के पास लाया जाना चाहिए।
किसी भी स्थिति में , गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाना चाहिए।( इसमें गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तारी के स्थान से मजिस्ट्रेट के पास लाए जाने का समय शामिल नहीं है)
किसी भी व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के आदेश के बिना, 24 घंटे से ज्यादा समय तक पुलिस हिरासत में नहीं रखा जा सकता है।
गिरफ्तार व्यक्ति डॉक्टर द्वारा अपने शरीर की चिकित्सा परीक्षण की मांग कर सकता है ।
पुलिस हिरासत

अगर कोई पुलिसकर्मी हिरासत में किसी व्यक्ति को सताता है या यातना देता है तो उस व्यक्ति को पुलिसकर्मी की पहचान कर उसके खिलाफ आपराधिक आरोप दर्ज करने चाहिए
अगर हिरासत मे महिला के साथ बलात्कार तथा यौन संबंधी अन्य दुर्व्यवहार होता है तो उसे तुरंत डॉक्टरी जांच की मांग करनी चाहिए तथा मजिस्ट्रेट से शिकायत करनी चाहिए।
किसी महिला को केवल महिलाओं वाले लॉक अप में रखा जाना चाहिए।
अगर किसी थाने में ऐसी व्यवस्था नहीं है तो हिरासत में ली गयी महिला को मांग करनी चाहिए कि उसे ऐसे थाने में भेजा जाए जहां महिलाओं के लिए लॉक अप हो।
उच्चतम न्यायालय के निर्देश

गिरफ्तार व्यक्ति को अपनी गिरफ्तारी औऱ हिरासत में लिए जाने की सूचना अपने मित्र, संबंधी या किसी अन्य व्यक्ति को देने का अधिकार है ।
गिरफ्तार करने वाले अधिकारी को किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर थाने ले जाते समय उसे सूचना देने के अधिकार की अवश्य जानकारी देनी चाहिए
जिस व्यक्ति को गिरफ्तार किए जाने वाले व्यक्ति ने अपनी गिरफ्तारी की जानकारी दी है , उसका नाम पुलिस डायरी में दर्ज किया जाना चाहिए।
जमानत का अधिकार

जमानत क्या है?

जमानत गिरफ्तार व्यक्ति को कुछ शर्तों पर पुलिस या न्यायिक अभिरक्षा से मुक्त करने की अनुमति है ।

अगर अपराध गैर-जमानती नहीं है तो पुलिस को गिरफ्तार व्यक्ति को जमानत पर छोड़ना ही होगा। 
अगर पुलिस अधिकारी या मजिस्ट्रेट पर्याप्त समझे तो व्यक्ति को निजी मुचलके या बंध-पत्र पर भी छोड़ा जा सकता है ।
जमानत और मुचलके पर रिहा व्यक्ति को जब भी अफसर या अदालत तलब करे, हाजिर होना होगा।
प्रतिभु (जमानतदार) क्या होते हैं?

प्रतिभु वे व्यक्ति होते हैं जो मुक्त किए गए व्यक्ति की आवश्यकतानुसार थाने या न्यायालय में उपस्थित प्रत्याभूत करते हैं । अगर मुक्त किया गया व्यक्ति पुलिस थाने या न्यायालय में उपस्थित नहीं होता है तो उसे वह रकम अदा करने के लिए समर्थ होना चाहिए, जिसके लिए वह प्रतिभु है।

पुलिस की जांच

अपराध की जांच के दौरान पुलिस आपसे पूछताछ करे तो आपको अपनी जानकारी की बातें सही-सही बताते हुए पुलिस के साथ सहयोग करना चाहिए।
संभव हो तो आपको अपराध का सुराग भी पुलिस को देना चाहिए और जुबानी पूछताछ का उचित जवाब देना चाहिए।
आपके लिए न तो किसी लिखित बयान पर दस्तखत करना जरुरी है, न ही आपको वे सब बातें लिखकर देनी होती हैं जो आपने जुबानी बताई हैं ।
पुलिस पूछताछ

अभियुक्त को पूछताछ के दौरान पुलिस से सहयोग करना चाहिए।
अभियुक्त को सावधान भी रहना चाहिए कि पुलिस उसे झूठे मामले में न फंसाए।
अभियुक्त को किसी कागज पर बिना पढ़े अथवा उसमें लिखी बातों से सहमत हुए बिना हस्ताक्षर नहीं करने चाहिए।
किसी महिला और 15 साल से छोटे पुरुष को पूछताछ के लिए घर से बाहर नहीं ले जाया जा सकता है । उनसे घर पर ही पूछताछ की जा सकती है ।
व्यक्ति मजिस्ट्रेट से अनुरोध कर सकता है कि उससे पूछताछ का उचित वक्त दिया जाए।
पूछताछ के दौरान व्यक्ति ऐसे किसी सवाल का जवाब देने से मना कर सकता है , जिससे उसे लगे कि उसके खिलाफ आपराधिक मामला बनाया जा सकता है ।
व्यक्ति पूछताछ के दौरान कानूनी या अपने किसी मित्र की सहायता की मांग कर सकता है और आम तौर पर ऐसी सहायता की मांग पुलिस मान लेती है।
तलाशी के लिए वारंट

अदालत या मजिस्ट्रेट के तलाशी वारंट के बिना पुलिस किसी के घर की तलाशी नहीं ले सकती है ।
आमतौर पर चोरी के सामान, फर्जी दस्तावेज, जाली मुहर, जाली करेंसी नोट, अश्लील सामग्री तथा जब्तशुदा साहित्य की बरामदगी के लिए तलाशी ली जाती है ।
पुलिस अधिकारी को तलाशी के स्थान पर मौजूद संदिग्ध व्यक्तियों और वस्तुओं की तलाशी लेने देनी चाहिए।
तलाशी और माल की बरामदगी इलाके के दो निष्पक्ष तथा प्रतिष्ठित व्यक्तियों की उपस्थिति में की जानी चाहिए।
पुलिस को जब्त सामान की ब्योरा देते हुए पंचनामा तैयार करना चाहिए। इस पर दो स्वतंत्र गवाहों के भी हस्ताक्षर होने चाहिए और इसकी एक प्रति उस व्यक्ति को भी दी जानी चाहिए जिसके घर/इमारत की तलाशी ली गयी हो।
तलाशी लेने वाले अधिकारी की भी , तलाशी शुरु करने से पहले , तलाशी ली जा सकती है ।
कोई पुरुष किसी महिला की शारीरिक तलाशी नहीं ले सकता है, लेकिन वह महिला के घऱ या कारोबार के स्थान की तलाशी ले सकता है

Monday, 29 June 2015

Net nutarlity....

नेट न्यूट्रैलिटी क्या है ?
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नेट न्यूट्रैलिटी पर मेरे जेहन में कुछ सवाल हैं. अगर कोई
जानकार साथी मेरे सवालों पर रोशनी डाल सके तो
मैं इस पूरी बहस को कुछ बेहतर तरीके से समझ सकूंगा.
मुझे उम्मीद है कि आप मेरी मदद जरूर करेंगे.
1. व्हॉट्स अप का रेवेन्यू मॉडल क्या है? और कितने
लोग हैं जो ऐसी किसी सुविधा के लिए पैसे का
भुगतान करने को तैयार हैं. डेटा चार्ज के अलावा.
क्योंकि डेटा चार्ज तो टेलीकॉम कंपनी के खाते में
जा रहा है. व्हॉट्स अप, स्काइप या फिर इनके जैसे
तमाम ऐप बनाने और चलाने वालों की कमाई कैसे
होगी?
2. रिलायंस का रिटेल भी है. ऑनलाइन कारोबार में
भी उसका दखल होगा. एटरटेल का भी रिटेल है.
ऑनलाइन कारोबार में उसका भी दखल होगा. जब
टेलीकॉम सेवा देने वाली कंपनियां अगर ऑनलाइन
रिटेल शुरू करेंगी तो इसकी क्या गारंटी है कि वो
अपने विरोधियों के बिजनेस को खराब करने के लिए
नेट न्यूट्रैलिटी को ताक पर नहीं रखेंगी?
3. व्हॉट्स ऐप की वजह से टेलीकॉम कंपनियों की
एसएमएस के जरिये होने वाली आमदनी घट रही है.
अगर व्हॉट्स ऐप कॉलिंग भी सही तरीके से चलने लगी
तो उसकी वजह से टेलीकॉम कंपनियों की आदमी और
घटेगी. डेटा रेवेन्यू जरूर मिलेगा. लेकिन डेटा रेवेन्यू और
कॉल रेवेन्यू में अंतर होता है. कॉल अगर आईएसडी हो
तो अंतर और भी ज्यादा होता है. तो उस घाटे की
भरपाई कैसे होगी?
4. व्हॉट्स अप और स्काइप जैसी कंपनियां टेलीकॉम
कंपनियों के साथ स्ट्रैटेजिक अलायंस में नहीं आएंगी
तो उनका लंबे समय तक रेस में बने रहना मुमकिन नहीं.
और स्ट्रैटेजिक अलायंस के लिए कुछ खास सुविधाओं
का लेन-देन तो करना ही होता है. रेवेन्यू शेयरिंग
करनी होती है. वह नेट न्यूट्रैलिटी के दौर में कैसे
मुमकिन है?
5. यहां यह भी ध्यान रखिये कि व्हॉट्स कॉलिंग या
फिर वीडियों कॉलिंग फ्यूचर है. इस तरह के ऐप बनाने
वाले भविष्य में कुछ कमाने की लालसा से काम करते
हैं. वह भी स्टॉर्टअप होते हैं. सर्विस ऐप्स का
इस्तेमाल ज्यादातर लोग मुफ्त में करते हैं. गूगल और
फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म्स में विज्ञापन की सुविधा है.
इंस्टाग्राम में भी विज्ञापन की गुंजाइश है. लेकिन
व्हॉट्स ऐप में यह सुविधा नहीं है. दूसरी तरफ लोग
डेटा का भी पैसा दें और फिर सर्विस का भी ऐसा
मानना बेबुनियाद है. इसलिए ऐप बनाने वाले
टेलीकॉम कंपनियों के साथ करार करते हैं. ताकि
टेलीकॉम कंपनियां उन ऐप्स को बेचें और अपने रेवेन्यू में
से उन्हें हिस्सा दें. ऐसे में क्या यह मुमकिन है कि कोई
कंपनी रेवेन्यू दे और उसका लाभ दूसरी कंपनी के ग्राहक
भी बराबर उठा सकें?
6. सर्च इंजन गूगल और यू-ट्यूब जैसे सोशल नेटवर्क को
छोड़ दिया जाए तो कोई भी कंपनी कंटेंट क्रिएट
करने वालों को अपनी कमाई में हिस्सेदारी नहीं
देती. टेलीकॉम कंपनियां जो कंटेंट की बुनियाद पर
डेटा के जरिये कमाई करती हैं और फेसबुक जैसे सोशल
नेटवर्क भी नहीं जिनके मुनाफे की बुनियाद ही हमारे
और आपके जैसे लोग हैं जो घंटों समय लगा कर मुफ्त का
कंटेंट तैयार करते हैं. टेलीकॉम कंपनियों तो मीडिया
संस्थानों से बेहतर स्पीड देने के नाम पर मोटी रकम
वसूलते हैं. ऐसे में कंटेंट का कारोबार करने वाले बड़ी
संस्थाएं भी विज्ञापनों की मोहताज बन कर रह
जाती हैं और ज्यादातर घाटे में चल रही हैं. अगर वो
टेलीकॉम कंपनियों के साथ एक्सक्लूसिव टाई-अप के
जरिए कमाना चाहती हैं तो उसमें बुराई क्या है? हममें
से कितने लोग इकॉनोमिस्ट को अच्छे कंटेंट के लिए
पैसा देते हैं? या फिर टाइम्स ऑप इंडिया को
ऑनलाइन पढ़ने के लिए पैसा देते हैं. या फिर
एनडीटीवी को उसके वीडियो न्यूज के लिए पैसा देते
हैं?

Tuesday, 2 June 2015

Muslim role in freedom ?

What is truth of DR. Khan's post ?

��It was Emperor Aurangzeb who first asked the East India Company to quit India in 1686 Surat!

��The first war against the British was fought almost 200 years before independence The Battle of Plassey, wherein Nawab Sirajuddawla of Bengal was treacherously defeated by the British in 1757!

��The first signs of victory against the British were seen in Mysore where Nawab Hyder Ali first waged war against the British in 1782. He was succeeded by his son,
��Tipu Sultan who again fought them in 1791 and was eventually treacherously defeated and martyred in 1799. Tipu Sultan was the first General to use missiles in warfare!

��The Mujahid Movement was active during 1824 and 1831 under the leadership of Syed Ahmad Shaheed and his two disciples and they were successful in liberating the North-west province from British authority. Syed Ahmad Shaheed was nominated Khalifa, but the freedom was short lived and he was martyred in 1831!

��The last Mughal Emperor, Bahadur Shah Zafar was to lead the War of Independence in 1857. A country-wide war was to begin simultaneously on the 31st of May 1857, but the Indians among the British army revolted before that on the 10th of May 1857!

��A startling 5,00,000 Muslims were martyred following the events of 1857, of which 5000 were Ulema (religious scholars). It is said that there was not a single tree on the Grand Trunk Road from Delhi to Calcutta but that an alims body was not found hanging on it for days together!

��Indian Ulema called for Jihad against the British and declared India as Darul Harb (Territory under Enemy control). This call found resonance all over the country with Muslims rising up against the British!

��To liberate the countrymen from the Cultural and Educational bondages of the colonial empire, towering centres of learning like the Darul Uloom Deoband, Darul Uloom Nadwa and the Aligarh Muslim University were established in the late 19th Century, which are still counted amongst the leading Indian seminaries!

��The Reshmi Rumaal Tehreeq was launched in 1905 by Shaikhul Islam Maulana Mehmood Hasan and Maulana Ubaidullah Sindhi to unite all the Indian states against the British. Maulana Mehmood was imprisoned in Malta and Kalapani for the same where he breathed his last!

��The Indian National Congress, from the time of its inception to independence has seen 9 Presidents who were Muslims!

��Barrister M. K. Gandhi served in a law firm in South Africa owned by a Muslim, who on his own expenses brought Gandhiji to India in 1916. Here, he started his agitation under the Ali Biradran (Ali Brothers)!

��The Mopla movement saw 3000 Muslims being martyred in a single battle!

��The Non-cooperation Movement and the Swadeshi Movement saw overwhelming Muslim participation. Janab Sabusiddiq who was the Sugar-king of that time gave up his business as a form of boycott. The Khoja and Memon communities owned the biggest business houses of that time and they parted with their treasured industries to support the boycott!

��The 1942 Quit India movement was actually planned by Maulana Abul Kalam Azad. He was imprisoned on the 8th of August and sent to Ahmadnagar, because of which Gandhiji had to lead the movement on the 9th of August!

��Jyotiba Phule was sponsored by his neighbour, Usman Bagban in his educational activities, so much so that the school in which he taught was owned by Mr. Usman. His daughter, Fatima was the first girl student there and joined as a teacher thereafter!

��Muslim leaders always supported the Dalit cause.
▪In the Round Table Conference held in London, Maulana Muhammad Ali Johar was lured into abandoning the Dalit cause in lieu of accepting all the other demands of the Muslims. But Maulana Johar refused to forsake the Dalits!

��When Dr. B.R. Ambedkar could not win the 1946 Central Elections, the Bengal Muslim League vacated one of its own seats and offered it to Dr. Ambedkar, who won it in the bypoll.
▪This gesture by the Muslim League paved the way for his entry into the Constituent Assembly and the rest as they say, is history!

��Muslims freedom fighters were active in the field of journalism as well.
▪Maulana Azad used his pen against the British despite being prevented by the colonial powers a number of times.
▪ In fact, the first journalist to be martyred in the cause of Indias Freedom Struggle was also a Muslim- Maulana Baqar Ali.

��So why have these points, and many many such similar ones, been relegated to the dustbin by our Historians?
��Why are these events of History not taught in our History classes?
��Why are our childrens text books bereft of these historical facts?
��Why this prejudice?
This is a deliberate attempt to discredit the Muslim leadership and indeed the Muslim masses, in order to spread in the Muslim community a sense of inferiority complex and to push them on a defensive stand.
�� What have you done for this nation to deserve the benefits of its independence?
we are asked!
��The Muslim community has played a pivotal role in Indias Freedom Struggle and it is high time we Indians are made aware of this untold and hidden aspect of History.
-Dr Siraj khan

Sunday, 31 May 2015

Beef meet exporter ?

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एक खबर पढ़ के मुझे बड़ा आश्चर्य हो रहा है!!!
यह खबर कितनी सच है मैं दावे से नहीं नहीं कह सकता। आप भी जांच करें।
भारत की 6 बड़ी गोश्त सप्लाई करने वाली कम्पनियों में से 4 के मालिक ब्राम्हण हैं। दुनिया का सबसे बड़ा "Beef meet�� exporter country"
ब्राज़ील है, उसके बाद India,
Australia, USA, और UK.
का न० आता है।

4 बड़ी भारतीय कम्पनियां और उनका पता-

1-Al-kbeer Exports Pvt Ltd.
(Owner- Shree Shatish &
Atul Sabharwal) 92, jolly
makers/ chembur Mumbai
400021

2- Arabian Exports pvt Ltd.
(owner- Shree Sunil Kapoor)
Russion mentions,
Overlies,
Mumbai 400001

3-M.K.R frozen food Exports pvt Ltd (Owner-
Shree Madan Abot)
MG Road, Janpath
NEW DELHI 110001

4-P.M.L Industries pvt.Ltd
(Owner- shree A.S bindra)
S.C.O. 62-63Sector 3
4 -A Chandigarh 160022

मुसलमान तो ऐसे ही बदनाम किये जाते हैं, जब कि सच्चाई ये है कि मुसलमानों से ज्यादा मीट खाने वाले ईसाई ,और यहूदी हैं।

अभी पिछले दिनों बकरीद पे फेसबुक पे तरह तरह की फोटो डाल के मुसलमानों के खिलाफ माहोल बनाया गया।

जबकि विश्व प्रसिद्ध
"पशुपति नाथ" के मंदिर, हिमाचल प्रदेश के कई
मंदिरों में बलि���� की प्रथा आज भी प्रचलित है।

अभी नेपाल के विश्व प्रसिद्ध
"गढ़ीमाई मंदिर " बेरियापुर में
28-29 नवम्बर को 5 लाख पशुओं की बलि दी जानी है।

यकीन ना हो तो Google पे सर्च कर सकते हैं।

कुछ समय पहले उत्तर कोरिया के एक  महंगे होटल की फोटो अखबारों में छपी थी, जिसमें 4-5 महीने के ढ़ेर सारे human embryo किचन की
रस्सी पे लाइन से बंधे लटके हुये थे।
मांसाहारी लोग. White meat के बारे में जरूर सुने होगें, जो इंग्लैंड, अमेरिका आदि देशो में बहुत खाया जाता है।

कभी सोचा है कैसे बनता है ?
गाय के बछड़े को महीनों भूखा रखा जाता है,जब वो मरणासन्न हो जाता है, तब उसे काटते हैं ।

Wednesday, 27 May 2015

40 tips of happy life

40 Tips For Better Life

1. Take A 10-30 Minutes Walk Every Day.
And While You Walk, Smile.

2. Sit In Silence For At Least 10 Minutes
Each Day.

3. Sleep For 7 Hours.

4. Live With The 3 E's -- Energy,
Enthusiasm, And Empathy.

5. Play More Games.

6. Read More Books Than You Did In 2014.

7. Make Time To Practice Meditation, Yoga,
And Prayer. They Provide Us With
Daily Fuel For Our Busy Lives.

8. Spend Time With People Over The Age Of
70 & Under The Age Of 6.

9. Dream More While You Are Awake.

10. Eat More Foods That Grow On Trees And
Plants And Eat Less Food That Is
Manufactured In Plants.

11. Drink Plenty Of Water.

12. Try To Make At Least Three People
Smile Each Day.

13. Don't Waste Your Precious Energy On
Gossip.

14. Forget Issues Of The Past. Don't
Remind Your Partner With His/her
Mistakes Of The Past. That Will Ruin Your
Present Happiness.

15. Don't Have Negative Thoughts Or
Things You Cannot Control. Instead
Invest Your Energy In The Positive Present
Moment.

16. Realize That Life Is A School And You
Are Here To Learn. Problems Are
Simply Part Of The Curriculum That Appear
And Fade Away Like Algebra Class
But The Lessons You Learn Will Last A
Lifetime.

17. Eat Breakfast Like A King, Lunch Like A
Prince And Dinner Like A Beggar.

18. Smile And Laugh More.

19. Life Is Too Short To Waste Time Hating
Anyone. Don't Hate Others.

20. Don't Take Yourself So Seriously. No
One Else Does.

21. You Don't Have To Win Every Argument.
Agree To Disagree.

22. Make Peace With Your Past So It Won't
Spoil The Present.

23. Don't Compare Your Life To Others'.
You Have No Idea What Their Journey
Is All About. Don't Compare Your Partner
With Others.

24. No One Is In Charge Of Your Happiness
Except You.

25. Forgive Everyone For Everything.

26.. What Other People Think Of You Is
None Of Your Business.

27. GOD ! Heals Everything.

28. However Good Or Bad A Situation Is, It
Will Change.

29. Your Job Won't Take Care Of You When
You Are Sick. Your Friends Will.
Stay In Touch.

30. Get Rid Of Anything That Isn't Useful,
Beautiful Or Joyful.

31. Envy Is A Waste Of Time. You Already
Have All You Need.

32. The Best Is Yet To Come.

33. No Matter How You Feel, Get Up, Dress
Up And Show Up.

34. Do The Right Thing!

35. Call Your Family Often.

36. Your Inner Most Is Always Happy. So
Be Happy.

37. Each Day Give Something Good To
Others.

38. Don't Over Do. Keep Your Limits.

39. When You Awake Alive In The Morning,
Thank GOD For It.

40. Please Forward This To Everyone You
Care About

Thursday, 21 May 2015

Manavvar raana

एक टूटी हुई कश्ती का मुसाफिर हूॅ मैं.

हाॅ निगल जायेगा एक रोज़ समुन्दर मुझको..

इससे बढ़ कर मेरी तौहीने अना क्या होगी.

अब गदागर भी समझते हैं गदागर मुझको..

जख़्म चेहरे पे, लहू आॅखो में, सीना छलनी.

ज़िन्दगी अब तो ओढ़ा दे कोई चादर मुझको..

मेरी आॅखों में वो बीनाई अता कर मौला.

एक आॅसू भी नज़र आये समुन्दर मुझको..

कोई इस बात को माने कि न माने लेकिन.

चाॅद लगता है तेरे माथे का झूमर मुझको..

दुख तो यह है मेरा दुश्मन ही नही है कोई.

ये मेरे भाई हैं कहते हैं जो बाबर मुझको..

मुझसे आॅगन का अंधेरा भी नही मिट पाया.

और दुनियाॅ है कि कहती है "मुनव्वर" मुझको..

                               "मुनव्वर राना"
मुद्दतों पहले जो डूबी थी वो पूँजी मिल गयी,
जो कभी दरया मैं फेंकी थी वो नेकी मिल गयी,,

ख़ुदकुशी करने पर आमादा थी नाकामी मेरी,
फिर मुझे दीवार पर चढ़ती ये चींटी मिल गयी,,

मैं इसे इनाम समझूँ या सज़ा का नाम दूँ,
उंगलियां कटते ही तोहफे मैं अंगूठी मिल गयी,,

मैं इसी मिट्टी से उठा था बबूला की तरह,
और फिर एक दिन मिटटी मैं मिटटी मिल गयी,,

फिर किसी ने लक्ष्मी देवी को ठोकर मार दी,
आज कूड़ेदान से फिर एक बच्ची मिल गयी,,

                               "मुनव्वर राना"
अभी तक कुछ नहीं बिगड़ा अभी बीमार ज़िन्दा है!
अभी इस शहर में उर्दू का इक अख़बार ज़िन्दा है!!

नदी की तरह होती हैं ये सरहद की लकीरें भी!
कोई इस पार ज़िन्दा है कोई उस पार ज़िन्दा है!!

ख़ुदा के वास्ते ऐ बेज़मीरी गाँव मत आना!
यहाँ भी लोग मरते हैँ मगर किरदार ज़िन्दा है!!

⭐⭐⭐मुनव्वर राना⭐⭐⭐
यह एहतराम तो करना ज़रूर पड़ता है!

जो तू ख़रीदे तो बिकना ज़रूर पड़ता है!!

बड़े सलीक़े से यह कह के ज़िन्दगी गुज़री!
हर एक शख़्स को मरना ज़रूर पड़ता है!!

वो दोस्ती हो मुहब्बत हो चाहे सोना हो!
कसौटियों पे परखना ज़रूर पड़ता है!!

कभी जवानी से पहले कभी बुढ़ापे में!
ख़ुदा के सामने झुकना ज़रूर पड़ता है!!

हो चाहे जितनी पुरानी भी दुश्मनी लेकिन!
कोई पुकारे तो रुकना ज़रूर पड़ता है!!

वफ़ा की राह पे चलिए मगर ये ध्यान रहे!
की दरमियान में सहरा ज़रूर पड़ता है.!!

मुनव्वर राना.
जिसे दुश्मन समझता हूँ वही अपना निकलता है
हर एक पत्थर से मेरे सर का कुछ रिश्ता निकलता है
डरा-धमका के तुम हमसे वफ़ा करने को कहते हो
कहीं तलवार से भी पाँव का काँटा निकलता है?
ज़रा-सा झुटपुटा होते ही छुप जाता है सूरज भी
मगर इक चाँद है जो शब में भी तन्हा निकलता है
किसी के पास आते हैं तो दरिया सूख जाते हैं
किसी की एड़ियों से रेत में चश्मा निकलता है
फ़ज़ा में घोल दीं हैं नफ़रतें अहले-सियासत ने
मगर पानी कुएँ से आज तक मीठा निकलता है
जिसे भी जुर्मे-ग़द्दारी में तुम सब क़त्ल करते हो
उसी की जेब से क्यों मुल्क का झण्डा निकलता है
दुआएँ माँ की पहुँचाने को मीलों-मील आती हैं
कि जब परदेस जाने के लिए बेटा निकलता है

मुनव्वर राना
मुहाजिर हैं मगर हम एक दुनिया छोड़ आए हैं,
तुम्हारे पास जितना है हम उतना छोड़ आए हैं ।

कहानी का ये हिस्सा आज तक सब से छुपाया है,
कि हम मिट्टी की ख़ातिर अपना सोना छोड़ आए हैं ।

नई दुनिया बसा लेने की इक कमज़ोर चाहत में,
पुराने घर की दहलीज़ों को सूना छोड़ आए हैं ।

अक़ीदत से कलाई पर जो इक बच्ची ने बाँधी थी,
वो राखी छोड़ आए हैं वो रिश्ता छोड़ आए हैं ।

किसी की आरज़ू के पाँवों में ज़ंजीर डाली थी,
किसी की ऊन की तीली में फंदा छोड़ आए हैं ।

पकाकर रोटियाँ रखती थी माँ जिसमें सलीक़े से,
निकलते वक़्त वो रोटी की डलिया छोड़ आए हैं ।

जो इक पतली सड़क उन्नाव से मोहान जाती है,
वहीं हसरत के ख़्वाबों को भटकता छोड़ आए हैं ।

यक़ीं आता नहीं, लगता है कच्ची नींद में शायद,
हम अपना घर गली अपना मोहल्ला छोड़ आए हैं ।

हमारे लौट आने की दुआएँ करता रहता है,
हम अपनी छत पे जो चिड़ियों का जत्था छोड़ आए हैं ।

हमें हिजरत की इस अन्धी गुफ़ा में याद आता है,
अजन्ता छोड़ आए हैं एलोरा छोड़ आए हैं ।

सभी त्योहार मिलजुल कर मनाते थे वहाँ जब थे,
दिवाली छोड़ आए हैं दशहरा छोड़ आए हैं ।

हमें सूरज की किरनें इस लिए तक़लीफ़ देती हैं,
अवध की शाम काशी का सवेरा छोड़ आए हैं ।

गले मिलती हुई नदियाँ गले मिलते हुए मज़हब,
इलाहाबाद में कैसा नज़ारा छोड़ आए हैं ।

हम अपने साथ तस्वीरें तो ले आए हैं शादी की,
किसी शायर ने लिक्खा था जो सेहरा छोड़ आए हैं ।
 
कई आँखें अभी तक ये शिकायत करती रहती हैं,
के हम बहते हुए काजल का दरिया छोड़ आए हैं ।

शकर इस जिस्म से खिलवाड़ करना कैसे छोड़ेगी,
के हम जामुन के पेड़ों को अकेला छोड़ आए हैं ।

वो बरगद जिसके पेड़ों से महक आती थी फूलों की,
उसी बरगद में एक हरियल का जोड़ा छोड़ आए हैं ।

अभी तक बारिसों में भीगते ही याद आता है,
के छप्पर के नीचे अपना छाता छोड़ आए हैं ।

भतीजी अब सलीके से दुपट्टा ओढ़ती होगी,
वही झूले में हम जिसको हुमड़ता छोड़ आए हैं ।

ये हिजरत तो नहीं थी बुजदिली शायद हमारी थी,
के हम बिस्तर में एक हड्डी का ढाचा छोड़ आए हैं ।

हमारी अहलिया तो आ गयी माँ छुट गए आखिर,
के हम पीतल उठा लाये हैं सोना छोड़ आए हैं ।

महीनो तक तो अम्मी ख्वाब में भी बुदबुदाती थीं,
सुखाने के लिए छत पर पुदीना छोड़ आए हैं ।

वजारत भी हमारे वास्ते कम मर्तबा होगी,
हम अपनी माँ के हाथों में निवाला छोड़ आए हैं ।

यहाँ आते हुए हर कीमती सामान ले आए,
मगर इकबाल का लिखा तराना छोड़ आए हैं ।

हिमालय से निकलती हर नदी आवाज़ देती थी,
मियां आओ वजू कर लो ये जूमला छोड़ आए हैं ।

वजू करने को जब भी बैठते हैं याद आता है,
के हम जल्दी में जमुना का किनारा छोड़ आए हैं ।

उतार आये मुरव्वत और रवादारी का हर चोला,
जो एक साधू ने पहनाई थी माला छोड़ आए हैं ।

जनाबे मीर का दीवान तो हम साथ ले आये,
मगर हम मीर के माथे का कश्का छोड़ आए हैं ।

उधर का कोई मिल जाए इधर तो हम यही पूछें,
हम आँखे छोड़ आये हैं के चश्मा छोड़ आए हैं ।

हमारी रिश्तेदारी तो नहीं थी हाँ ताल्लुक था,
जो लक्ष्मी छोड़ आये हैं जो दुर्गा छोड़ आए हैं ।

गले मिलती हुई नदियाँ गले मिलते हुए मज़हब,
इलाहाबाद में कैसा नाज़ारा छोड़ आए हैं ।

कल एक अमरुद वाले से ये कहना पड़ गया हमको,
जहां से आये हैं हम इसकी बगिया छोड़ आए हैं ।

वो हैरत से हमे तकता रहा कुछ देर फिर बोला,
वो संगम का इलाका छुट गया या छोड़ आए हैं।

अभी हम सोच में गूम थे के उससे क्या कहा जाए,
हमारे आन्सुयों ने राज खोला छोड़ आए हैं ।

मुहर्रम में हमारा लखनऊ इरान लगता था,
मदद मौला हुसैनाबाद रोता छोड़ आए हैं ।

जो एक पतली सड़क उन्नाव से मोहान जाती है,
वहीँ हसरत के ख्वाबों को भटकता छोड़ आए हैं ।
 
महल से दूर बरगद के तलए मवान के खातिर,
थके हारे हुए गौतम को बैठा छोड़ आए हैं ।

तसल्ली को कोई कागज़ भी चिपका नहीं पाए,
चरागे दिल का शीशा यूँ ही चटखा छोड़ आए हैं ।

सड़क भी शेरशाही आ गयी तकसीम के जद मैं,
तुझे करके हिन्दुस्तान छोटा छोड़ आए हैं ।

हसीं आती है अपनी अदाकारी पर खुद हमको,
बने फिरते हैं युसूफ और जुलेखा छोड़ आए हैं ।

गुजरते वक़्त बाज़ारों में अब भी याद आता है,
किसी को उसके कमरे में संवरता छोड़ आए हैं ।

हमारा रास्ता तकते हुए पथरा गयी होंगी,
वो आँखे जिनको हम खिड़की पे रखा छोड़ आए हैं ।

तू हमसे चाँद इतनी बेरुखी से बात करता है
हम अपनी झील में एक चाँद उतरा छोड़ आए हैं ।

ये दो कमरों का घर और ये सुलगती जिंदगी अपनी,
वहां इतना बड़ा नौकर का कमरा छोड़ आए हैं ।

हमे मरने से पहले सबको ये ताकीत करना है ,
किसी को मत बता देना की क्या-क्या छोड़ आए हैं ।

[1:01PM, 6/6/2015] iqbalhindustani: बेटी बहन बीबी के रिश्ते के समाजिक पहलू  पर एक शायर का नज़रिया

आने वाले दिन मसाइल ले के आएंगे ‘बशीर’
घर के आंगन में कई चेह्रे जवां हो जाएंगे

एक शायरा ने इस दर्द का इज़हार यूं किया-

दहेज़ की बदौलत मियां-बीवी के माबैन तलाक़ तक बात पहुंची तो एक शेर ने जन्म ले ही लिया-

तलाक़ दे तो रहे हो ग़ुरूरो-क़ह्र के साथ! !
मेरा शबाब भी लौटा दो मेरे मेह्र के साथ! !

जाने माने शायर जनाब मुनव्वर राना ने रिश्तों को लेकर हमेशा अतभुत काव्य रचा है. उनकी ग़ज़लों में रिश्तों की महक का रंग कुछ ख़ास ही रहा है.

घरों में यूँ सयानी लड़कियाँ बेचैन रहती है
कि जैसे साहिलों पर कश्तियाँ बेचैन रहती हैं

ये चिड़िया भी मेरी बेटी से कितनी मिलती जुलती है
कहीं भी शाख़े-गुल देखे तो झूला डाल देती है

रो रहे थे सब तो मै भी फ़ूटकर रोने लगा
वरना मुझको बेटियों की रूख़सती अच्छी लगी
[1:01PM, 6/6/2015] iqbalhindustani: अगली कड़ी
घर में रहते हुए ग़ैरों की तरह होती हैं
बेटियाँ धान के पौधों की तरह होती हैं

उड़के एक रोज़ बड़ी दूर चली जाती हैं
घर की शाख़ों पे ये चिड़ियों की तरह होती हैं

सहमी-सहमी हुई रहती हैं मकाने दिल में
आरज़ूएँ भी ग़रीबों की तरह होती हैं

टूटकर ये भी बिखर जाती हैं एक लम्हे में
कुछ उम्मीदें भी घरौंदों की तरह होती हैं

बाप का रुत्बा भी कुछ कम नहीं होता लेकिन
जितनी माँएँ हैं फ़रिश्तों की तरह होती हैं

मुनव्वर राना
[1:18PM, 6/16/2015] iqbalhindustani: ज़रूरत  से अना का भारी पत्थर टूट जाता है
मगर फिर आदमी भी अन्दर -अन्दर टूट जाता है

ख़ुदा के वास्ते इतना न मुझको टूटकर चाहो
ज़्यादा भीख मिलने से गदागर टूट जाता है

तुम्हारे शहर में रहने को तो रहते हैं हम लेकिन
कभी हम टूट जाते हैं कभी घर टूट जाता है

मुनव्वर राना
[1:18PM, 6/16/2015] iqbalhindustani: वो महफ़िल में नहीं खुलता है तनहाई में खुलता है
समुन्दर कितना गहरा है ये गहराई में खुलता है

जब उससे गुफ़्तगू कर ली तो फिर शजरा नहीं पूछा
हुनर बखियागरी का एक तुरपाई में खुलता है

फ़क़त ज़ख़्मों से तक़लीफ़ें कहाँ मालूम होती हैं
पुरानी कितनी चोटें हैं ये पुरवाई में खुलता है

मुनव्वर राना
[1:18PM, 6/16/2015] iqbalhindustani: जिसने भी इस खबर को सुना सर पकड़ लिया
कल इक दिए ने आँधी का कालर पकड़ लिया
जिसकी बहादुरी के वो किस्से लिखे गए
निकला शिकार पे तो कबूतर पकड़ लिया
इक उम्र तक तो मुझको तेरा इंतज़ार था
फिर मेरी आरजुओं ने बिस्तर पकड़ लिया
.........मुनव्वर .......
[10:03AM, 6/18/2015] iqbalhindustani: मुनव्वर राना:

बिछड़ेंगे तो मर जाएंगे हम दोनो हम दोनो बिछड़कर
इक डोर में हमको यही डर बांधे हुए है.

ठंडे मौसम में भी सड़ जाता है बासी खाना
बच गया है तो ग़रीबों के हवाले कर दे.

कोई दु:ख तो कभी कहना नहीं पड़ता उससे
वह ज़रूरत को तलबगार से पहचानता ह
[8:46AM, 6/27/2015] iqbalhindustani: कई घर हो गए बरबाद ख़ुद्दारी बचाने में
ज़मीनें बिक गईं सारी ज़मींदारी बचाने में

कहाँ आसान है पहली मुहब्बत को भुला देना
बहुत मैंने लहू थूका है घरदारी बचाने में

कली का ख़ून कर देते हैं क़ब्रों की सजावट में
मकानों को गिरा देते हैं फुलवारी बचाने में

कोई मुश्किल नहीं है ताज उठाना पहन लेना
मगर जानें चली जाती हैं सरदारी बचाने में

बुलावा जब बड़े दरबार से आता है ऐ 'राना'
तो फिर नाकाम हो जाते हैं दरबारी बचाने में
~मुनव्वर राना
[5:06PM, 7/2/2015] iqbalhindustani: समझौतों की भीड़-भाड़ में सबसे रिश्ता टूट गया
इतने घुटने टेके हमने, आख़िर घुटना टूट गया

देख शिकारी तेरे कारण  एक परिन्दा टूट गया,
पत्थर का तो कुछ नहीं बिगड़ा, लेकिन शीशा टूट गया

घर का बोझ उठाने वाले बचपन की तक़दीर न पूछ
बच्चा घर से काम पे निकला और खिलौना टूट गया

किसको फ़ुर्सत इस दुनिया में ग़म की कहानी पढ़ने की
सूनी कलाई देखके लेकिन, चूड़ी वाला टूट गया

ये मंज़र भी देखे हमने इस दुनिया के मेले में
टूटा-फूटा नाच रहा है, अच्छा ख़ासा टूट गया

पेट की ख़ातिर फ़ुटपाथों पर बेच रहा हूँ तस्वीरें
मैं क्या जानूँ रोज़ा है या मेरा रोज़ा टूट गया

▪मुनव्वर राना