Thursday, 28 May 2026

मॉडर्न बहु

*आज का विचार... हिंदुस्तानी*
*लोगों का काम है कहना,* 
*आपका हक़ है ज़िन्दा रहना*
            अब तक सुना पढ़ा था बच्चे ने फेल होकर प्रेमी प्रेमिका ने प्यार में धोखा खाकर या किसी ने कर्ज़ में डूबकर आत्महत्या कर ली। लेकिन अपनी पुत्र वधु स्नेहा के मॉडर्न लाइफ़ स्टाइल से आहत होकर सास ससुर ने हरियाणा में अपनी जान दे दी। इसके पीछे की वजह जानकर आपको भी दुख होगा। हैरत भी होगी। हुआ यह कि स्नेहा दिल्ली के मॉडर्न परिवार में पली-बढ़ी एक खुले विचारों की लड़की है। स्नेहा की लव मैरिज हरियाणा के पानीपत के गांव नारा निवासी आशीष के साथ परिवार की सहमति से ही हुई थी। आशीष अपने माता पिता राजेश और पत्नी सुमन का इकलौता बेटा है। चूंकि स्नेहा मॉडर्न परिवार से थी और गांव के माहौल में ढलना नहीं चाहती थी। सास-ससुर को उसके छोटे कपड़ों से परेशानी थी। उसके पहनावे और रहन-सहन को लेकर अक्सर घर में टोका-टाकी होती थी। सुमन और राजेश चाहते थे कि बहू सूट और साड़ी पहने, लेकिन स्नेहा को यह रोकटोक मंजूर नहीं थी। 
      जिसकी वजह से परिवार में अक्सर झगड़ा होता रहता था। पिछले दिनों फिर इसी बात को लेकर जबरदस्त विवाद हुआ, जिसके बाद स्नेहा के सास ससुर राजेश और सुमन ने विषैला सल्फ़ाज़ खा लिया। दोनों को इलाज के लिए तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन उन्होंने दम तोड़ दिया। एक ही घर से दो अर्थियां उठने से पूरे गांव में सन्नाटा छा गया। 
         सुसाइड की खबर मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने बहू पर सुसाइड के लिए उकसाने का मामला दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। परिजनों ने बताया कि बहू दिल्ली के मॉडर्न परिवार में पली-बढ़ी थी और वह शादी के बाद गांव के माहौल में ढलने को किसी कीमत पर भी तैयार नहीं थी। तलाक़ ही एक रास्ता था जिसके लिए पति तैयार नहीं था। 
      उसका पति भी उसको अपने तरीके से जीने की आज़ादी देने के पक्ष में था। वह दिल्ली का कल्चर छोड़ना नहीं चाहती थी। उसके पहनावे और रील्स बनाने के शौक को लेकर अक्सर सास ससुर और गांव वाले टोका-टाकी करते थे, जो धीरे-धीरे बड़े क्लेश का रूप लेने लगा। सवाल यह है कि आप जिस परिवेश में रहते हैं जिस सोच के हैं और जिस जीवन शैली को पसंद करते हैं उसके जैसी ही बहु लानी चाहिए, लेकिन क्योंकि लड़के ने सोशल मीडिया पर प्रेमिका बनी लड़की से अपनी पसंद से लव मैरिज की थी तो सास ससुर को शादी की सहमति नहीं देनी थी। अगर आपका लड़का नहीं मानता तो आपको उससे संबंध तोड़ लेने थे या सीमित कर लेने थे। अपने लड़के और मॉडर्न बहु को कहीं शहर में रखना था। 
     अगर गांव में रखना मजबूरी थी तो लोग क्या कहेंगे इसकी परवाह नहीं करनी थी क्योंकि लोगों का काम है कहना, और आपका हक़ है सम्मान के साथ ज़िंदा रहना। गांव हो या शहर हर किसी को अपने हिसाब से शादी करना अपने तरीके से जीना और अपनी पसंद के कपड़े व खाना बुनियादी अधिकार है। इस अलग राय सोच और समझ को लेकर झगड़ा करना गांव वालों के ताने सुन कर अपमानित महसूस करना और यहां तक कि जान दे देना ठीक नहीं माना जा सकता। सास ससुर को हर हाल में ज़िंदा रहने का उसी तरह अधिकार है जैसे बहु को अपने छोटे कपड़ों और खुले विचारों के साथ जीना पसंद रहा है। अंजुम रहबर का एक शेर याद आ रहा है...
*उसकी पसंद और थी मेरी पसंद और,*
*इतनी ज़रा सी बात पे घर छोड़ना पड़ा।*

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