Wednesday, 13 May 2026

चिड़िया का बच्चा

*आज का विचार*
_इक़बाल हिंदुस्तानी 
*चिड़िया_का_बच्चा_चाइनीज़_मांझा और हमारा परिवार...* 🤔
कुछ दिन पहले हमारे घर में एक पौधे पर एक खूबसूरत चिड़िया ने घोंसला बनाया। उसके बाद उसने अंडे दिए। उसके बाद एक बच्चा पैदा हुआ। चिड़िया उसकी देखभाल कर ही रही थी। हम लोग भी आंधी या बारिश में उस घोंसले पर कपड़े सुखाने का स्टैंड लगाकर उस पर प्लास्टिक की शीट डाल देते थे। चिड़िया उस मासूम बच्चे के लिए अक्सर अपने मुँह में कीड़े लाती थी और अपने बच्चे को खिलाती थी। कभी कभी चिड़िया बहुत देर से आती या पूरी रात नहीं आती तो बच्चे के भूखा होने और लगातार बोलने पर मेरा बेटा या बेगम उसको चावल या दूध खिलाने पिलाने की कोशिश करते थे। एक छोटी कटोरी में पीने को पानी भी रख दिया था। अभी तक सब ठीक चल रहा था। बच्चा धीरे धीरे बड़ा हो रहा था। उसके पर भी निकलने लगे थे। उड़ने की तैयारी कर रहा था। आँखे खोलता था। मां खाना लाती तो फौरन मुंह खोलता था। ऐसा लगता था उसकी आवाज़ से जैसे चिड़िया के देर से आने की मासूम शिकायत कर रहा है ।अचानक एक दिन उसकी चिड़िया मां जब खाने को कुछ लाई। उसके मुंह में उस खाने को डाल दिया। पता लगा आए दिन लोगों की गर्दन और हाथ काटने को बदनाम चायनीज़ मांझा भी उस खाने के साथ उलझा हुआ था। वही हुआ जिसका डर था कि खाना निगलने से पहले ही मांझा चिड़िया के बच्चे के मुंह में फंस गया। मासूम बच्चा दर्द से चिल्लाने लगा। उसके बोलने की आवाज़ में दर्द की असहनीय तकलीफ़ सुनकर ही महसूस हो रही थी। मैं ने जैसे ही वो मांझा बच्चे के मुंह से निकालना चाहा देखा तो उसके मुंह में जीभ के साथ चिपका हुआ था। इसी दौरान उसकी मां चिड़िया ने बच्चे को खतरा देख मेरे सर पर हमला करना चाहा और ज़ोर ज़ोर चीखना शुरू कर दिया। फिर मेरे बेटे ने चिड़िया के वहां से जाने का वेट करने को कहा। चिड़िया कुछ देर बाद उड़ गई। फिर बेटे ने बड़ी फुर्ती से बच्चे के मुंह में फंसा मांझा छोटी कैंची से काटकर निकाल दिया। इसके बाद बच्चा नॉर्मल हो गया। चिड़िया भी वापस घोंसले में आकर उसके साथ सहज होकर बैठ गई। उसके लिए जो खाना लाई वो बच्चा आराम से खा रहा है। दोनों खुश हैं और इधर हमारा पूरा परिवार भी चिड़िया और उसके बच्चे की खुशी से सकून से है। बच्चे के मुंह से मांझा निकालने और बच्चे व चिड़िया के नॉर्मल हो जाने से ऐसा सुख मिला मानो किसी फैमिली मेंबर का ऑपरेशन कामयाब हो गया हो। चिड़िया जब जब घर में आती है, चहचहाती है, उसका बच्चा बोलता है, तो घर में ऐसे रौनक हो जाती है जैसे परिवार का कोई बच्चा जब खिलखिलाता है तो परिवार खुशी से भाव विभोर हो जाता है। परिंदों की भी अपनी दुनिया है लेकिन जब वे कभी कभी कुछ टाइम के लिए हम इंसानों के साथ रहने लगते हैं तो उनके सुख दुख भी हमारे खुशी ग़म हो जाते हैं। यह हमने इससे पहले भी कई बार शिद्दत से महसूस किया है। आपने भी कभी कभी ऐसा ही महसूस किया होगा। अगर हम में इंसानियत मुहब्बत और संवेदनशीलता है तो हम इंसानों का नहीं सभी जीवों का दर्द और खुशी महसूस कर सकते हैं। हम एक ऐसी दुनिया बना सकते हैं जिसमें पूरी कायनात के जीव मिल जुलकर दुख सुख साझा करके और एक दूसरे की मदद कर के आराम से प्यार से सह अस्तित्व के साथ रह सकते हैं। 
मनव्वर राणा का माँ बच्चे पर लिखा एक शेर याद आ रहा है_*खाने की चीज़ें माँ ने जो भेजी हैं गाँव से,*
*बासी भी हो गई हैं तो लज़्ज़त वही रही।*

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