*घरेलू औरत नहीं है बेकार,*
*उसके काम की वैल्यू 30 हज़ार*
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों दुर्घटना मृत्यु के एक मामले में मुआवजा तय करते हुए घरेलू औरत के काम की कीमत 30,000 रुपए मासिक मानी है। साथ ही कोर्ट ने हर तीन साल में इसमें 10 प्रतिशत बढ़ोत्तरी और अगर वो महिला कोई और काम भी करती हो तो उसकी कीमत अलग से जोड़ने को कहा है।
कुछ लोग केवल उन महिलाओं के काम की वैल्यू समझते हैं, जो घर से बाहर जाकर बिज़नेस या नौकरी करती हैं। उनका मानना है कि जो कमाकर नहीं लाता वो बेकार है। जबकि आप हिसाब जोड़ें तो महिलाएं घर में सुबह सबसे पहले उठती हैं और सबसे बाद में सोती हैं। घर से बाहर काम करने वाले हर पुरुष के काम के घंटे तय होते हैं, छुट्टी भी मिलती है, वो खुद भी अवकाश लेता है और वह एक्स्ट्रा काम करता है तो उसको डबल रेट से ओवरटाइम भुगतान भी होता है। जबकि घर की महिला को ऐसा कुछ नहीं मिलता। उसको पर्याप्त आराम भी नहीं मिलता। साथ ही उसकी नींद के घंटे भी कम हो जाते हैं। अगर आप उनके खाना बनाने नाश्ता बनाने बार बार चाय बनाने सफ़ाई कपड़े व बर्तन धोने प्रेस करने बिस्तर बिछाने बच्चों व बुजुर्गों की देखभाल त्यौहार पर अतिरिक्त तैयारी करने, शादी बर्थडे या बच्चा पैदा होने पर एक्स्ट्रा काम का बोझ झेलने, बच्चों को होम वर्क कराने, उनको स्कूल छोड़ने और लेने जाने, उनकी माता पिता की और अपनी व कभी कभी पति की भी दवाई लाने, लाइन में लगकर सरकारी राशन लाने, पर्दे साफ़ करने, घर के जाले झाड़ने, सोफों के कवर बदलने, बच्चों के खिलौने संभालकर रखने, मेहमानों को अटेंड करने, टंकी में पानी भरने, घर का सामान खरीदने को लिस्ट बनाने, परिवार की तरफ़ से दूसरे रिश्तेदारों के लेनदेन का हिसाब रखने, सबके सोने पर लाइटें बंद करने, घर में पेंट होने पर सामान हटाने फिर सेट करने, बाज़ार से कपड़ों सहित घरेलू इस्तेमाल का सामान खरीदने आदि का बेतहाशा काम वो करती हैं।
देश की जीडीपी में घरेलू महिलाओं के काम का 17 प्रतिशत योगदान माना जाता है। फिर भी लिंग के आधार पर महिलाओं के घरेलू काम को फ्री समझा जाता है और उनको बेकार। जबकि आर्थिक समानता के हिसाब से देखें तो सबको वेतन नहीं मिलने बावजूद घरेलू महिलाओं का घर के काम में जो योगदान माना गया है, उतना देश के आधे से अधिक पुरुष भी नहीं कमाते। घरेलू महिलाएं एक तरह से राष्ट्र निर्माता हैं। वे देश की सभ्यता संस्कृति और धर्म की परंपराओं को आगे बढ़ाती हैं। ऐसी सभी महिलाओं को हमारा सलाम।
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