*आज के माहौल में रियाजउद्दीन जैसे लोग फ़रिश्तों जैसे ही हैं*
आज हम देखते हैं अधिकांश लोग इतने आत्ममुग्ध और असंवेदनशील होते जा रहे हैं कि थोड़े से फायदे के लिये किसी की जान ले लेते हैं या ज़रा सा त्याग करना पड़ जाए तो मुंह फेरकर निकल जाते हैं। लेकिन संतोष की बात यह है कि दूसरों के लिये अपना अब कुछ न्योछावर करने वाले रियाजउद्दीन जैसे संत लोग भी इसी दुनिया में मौजूद हैं।
रियाजुद्दीन मंसूरी मालवीय नगर दिल्ली के हौज रानी इलाके में गद्दे और रजाई की दुकान चलाते हैं। वे पिछले चालीस साल से वहाँ रहते और व्यापार करते हैं। उनके बेटे अरमान भी उनके साथ काम करते हैं। वे सिविल डिफेंस वॉलंटियर भी हैं।
पिछले दिनों 4 जून को जब इलाके के मशहूर फ्लोरिश स्टे होटल में जब आग लगी तो कुछ लोग जान बचाकर भाग गए, कुछ ने पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी लेकिन रियाजउद्दीन ने मुसीबत के टाइम भी अपने होश हवास पर काबू रखते हुए वो किया जो वो कर सकते थे।
मालवीय नगर के हौज रानी में पांच मंजिला होटल में जिस समय भीषण आग लगी। तो लोग जान बचाने के लिए खिड़की से मदद मांग रहे थे। उस समय अफरातफरी का माहौल था। किसी को यह समझ नहीं आ रहा था कि जब तक फायर ब्रिगेड और सरकारी सहायता नहीं पहुंचे तब तक इतनी बड़ी सीढ़ी कहां से लायें और इन लोगों की जान कैसे बचाएं। इस हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई ,और अनेक जख्मी भी हुए हैं।मरने वालों में कई विदेशी मेहमान भी शामिल थे। होटल के सामने ही रियाजुद्दीन की रज़ाई गद्दों की दुकान है। जब लोग ऊपरी मंजिलों से धुएँ और लपटों से बचने के लिए खिड़कियों से कूदने को मजबूर हुए, तब रियाजुद्दीन मंसूरी और उनके बेटे अरमान ने तुरंत अपनी दुकान से दो दर्जन से अधिक गद्दे और रजाइयाँ निकालकर सड़क पर बिछा दीं। इससे कूदने वालों को गंभीर चोटों से बचाया गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार उन्होंने कम से कम 8 से 10 लोगों की जान बचाई कुछ मीडिया रिपोर्ट में इस संख्या को 20 तक भी बताया गया है। लेकिन यहां तादाद का सवाल नहीं है बल्कि रियाजउद्दीन की नीयत इरादे और इंसानियत की भावना का है। उन्होंने उन मृतकों को ढकने के लिए चादर भी उपलब्ध कराईं। जिनको तमाम कोशिशों के बावजूद जलने दम घुटने के कारण मरने से बचाया नहीं जा सका।
मानवता के इस नेक काम में अगर आर्थिक नुकसान की बात करें तो रियाज़उद्दीन के लगभग दो से चार लाख रुपये के गद्दे रजाई का इस्तेमाल हुआ या जल गये, लेकिन उन्होंने इसकी फ़िक्र न करते हुए कहा कि “इंसानियत के लिए आगे आए, कुछ जानें बच पाईं, यही सबसे बड़ी बात है।”
ख़बर है कि उन्हें सरदार पटेल सेवा दल जैसी संस्थाओं ने सम्मानित किया है और एक लाख रुपये की सहायता राशि दी गई है। समाजसेवी इंसानियत पसंद और आपसी भाईचारे में विश्वास रखने वाले लोग उनके लिए सरकार से पर्याप्त मुआवजे की मांग भी कर रहे हैं क्योंकि उनका नेक काम के दौरान व्यापारिक नुकसान हुआ। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने उनको सम्मानित करने और पुरस्कृत करने का ऐलान भी किया है, लेकिन यह नहीं पता आज की राजनीति के चलते यह काम कब होगा या होगा भी नहीं?
यह घटना इंसानियत और साहस की मिसाल बन गई है। रियाजुद्दीन जैसे आम नागरिकों ने दिखाया कि संकट के समय कोई भी फरिश्ता बन सकता है।
रियाजउद्दीन ने शायर की इस सोच को ताज़ा कर दिया है...
*ग़मो की आँच पर आंसू उबालकर देखो, बनेंगे रंग जो किसी पर भी डालकर देखो, तुम्हारे दिल की चुभन भी ज़रूर कम होगी, किसी के पांव से कांटा निकालकर देखो।*
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