*दूसरों के लिए आफ़त मत बनाओ*
*इक़बाल हिंदुस्तानी*
आजकल जिस तरह से युवा मोबाइल के दीवाने हैं। उसी तरह से उनका दूसरा प्यार बाइक बन चुकी है। कुछ युवक युवतियां स्कूटर और स्कूटी भी चलाते हैं लेकिन बाइक चलाने वाले उनकी तुलना में कई गुना अधिक हैं। लोवर मीडियम और मीडियम क्लास जहां 75,000 से एक लाख तक की बाइक चलाते हैं, वहीं अपर मीडियम और अपर क्लास बहुत महंगी मॉडर्न और स्पोर्ट बाइक चलाते है। ये अन्य सुविधाओं के साथ ही स्टार्ट होते ही बहुत तेज़ स्पीड पकड़ लेती हैं। असली प्रॉब्लम यहीं से शुरू होती हैं। फैशन और स्पीड का दीवाना युवा ये आधुनिक बाइक चलाते हुए पूरी सावधानी नहीं बरतता। वह हेलमेट नहीं लगाता, डी एल नहीं बनवाता, दो नहीं तीन नहीं चार चार साथियों को बाइक पर बैठाकर गली मुहल्ले में ही नहीं हाईवे और एक्सप्रेस वे पर भी निकल जाता है। खुद की जान के साथ सड़को पर पैदल या दूसरे हल्के वाहनों से जा रहे लोगों की जान भी खतरे में डालता है। कई बार एक्सीडेंट होते हैं। युवा जान से हाथ धो बैठते हैं। मातापिता लाड प्यार में नाबालिग बच्चों को भी टू व्हीलर की चाबी दे देते हैं जोकि नियम कानून ही नहीं उनकी अपनी सुरक्षा के लिए मुसीबत बन जाती है। बड़े चौराहों और राष्ट्रीय राज मार्गों पर तो कभी कभी पुलिस इन वाहनों की चेकिंग करके चालान काट भी देती है, लेकिन नगरो कस्बों गांवों के गली मोहल्लों में ये बाइक सवार युवा सरपट दौड़ते रहते हैं। इनके प्रेशर हार्न से बच्चे बुजुर्ग और बीमार सो नहीं पाते या सोते सोते चौंक कर बार बार जाग जाते हैं। ये अपनी बाइकों में मोडिफाइड साइलेंसर गैर कानूनी होने के बावजूद धड़ल्ले से इस्तेमाल करते हैं।
इन अवैध साइलेंसर से बार बार पटाखा फूटने की दिल हिला देने वाली तेज़ आवाजें गूंजती रहती हैं लेकिन इन बेलगाम और बिगड़े हुए युवाओं की मौज मस्ती पर कोई फ़र्क नहीं पड़ता। अव्वल तो गली मोहल्लों में इनको पुलिस पकड़ती ही नहीं है, अगर ये गलती से किसी व्यस्त चौराहे या हाईवे पर पकड़े भी जाते है तो अपने परिवार के रसूख का इस्तेमाल नहीं तो यातायात पुलिस की जेब गर्म और कोई भी विकल्प उपलब्ध नहीं होने पर चालान कटवाकर भर देते हैं या कभी कभी मौक़े से दुस्साहस दिखाते हुए भाग भी जाते हैं। कई नगरों में कई सड़कों पर बहुत ऊंचे स्पीड ब्रेकर होने या जाम लगा होने पर ये स्पीड काबू नहीं कर पाने से भयंकर टक्कर भी मार देते हैं और भाग जाते हैं। इन बिगड़े हुए युवाओं की इन लापरवाही मनमानी और खतरनाक बाइक स्टंट से नागरिक बहुत परेशान हैं। वे मंदिर मस्जिद व अन्य धार्मिक स्थलों आश्रमों धर्मशालाओं में पूजा नमाज से लेकर अस्पताल में अमन सकून से इलाज तक नहीं करा पाते। स्कूल कॉलेज के बच्चे इनके हॉर्न और मोडिफाइड साइलेंसर के कर्कश असहनीय शोर से पढ़ भी नहीं पाते।
ऐसी बाइक पास से गुजरने मात्र से कई मासूम बच्चे महिलाएं और बूढ़े बुजुर्ग तो एक्सीडेंट के खौफ से बुरी तरह काँप जाते हैं या डिसबैलेंस होकर रास्ते में ही गिरकर चोट खा जाते हैं। इन बेकाबू बाइकर्स के डरावने कोलाहल से कभी कभी अवारा बेसहारा जानवर बौखलाकर रोड पर बेतहाशा दौड़ने लगते है जिससे पैदल या वाहन पर चलते दूसरे लोग उनकी ज़द में आकर बुरी तरह घायल या मौत का शिकार हो जाते हैं। कई बाइक और दूसरे वाहनों की प्रदूषण की जांच या तो बरसों तक होती नहीं या फिर वे फील गुड कराकर फ़र्ज़ी सर्टिफिकेट हासिल कर लेते हैं, जिससे वे जिधर से निकलते हैं, उधर ज़हरीला धुआँ छोड़ते जाते हैं और लोग उनको बददुआ देते रहते हैं। इनकी इन बढ़ती समाज विरोधी शांति विरोधी और नागरिक सुरक्षा की दुश्मन हरकतों का कोई समाधान सरकार प्रशासन और पुलिस के पास अभी तक नहीं है। काश इन नौजवानों और उनके परिवार वालों को सिविक सेंस नागरिक जिम्मेदारी और सामाजिक कर्तव्य बोध हो और वे अपने बच्चों को अच्छे संस्कार संवेदनशीलता और मानवता का पाठ पढ़ा सकें जिससे वे अपनी बाइक को चलती फिरती आफ़त मुसीबत और यमदूत बनने से बच सकें।
*नई उम्रों की ख़ुदमुख़्तारियों को कौन समझाये,*
*कहाँ से बच के चलना है कहाँ जाना ज़रूरी है*
(नोट_लेखक नवभारत टाइम्स डॉट कॉम के ब्लॉगर हैं)
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