Sunday, 5 July 2026

देर ना हो जाए कहीं...

*आज की बात... हिंदुस्तानी*
*इम्तेहान हो या प्लेन व रेल, कैसे बने समय से तालमेल?*
        पिछले दिनों हुई नीट की चर्चित परीक्षा में कुछ बच्चों को समय पर नहीं पहुंचने पर सेंटर में एंट्री नहीं मिली। इससे उनका पेपर छूट गया। उनका एक साल भी खराब हुआ और उनके परिवार का लाखों रुपया भी। इससे कुछ बच्चों ने आहत होकर अपनी जान भी दे दी। लेकिन यह कोई हल नहीं है। कुछ लोग ट्रेन से जाने के लिए भी रेलवे स्टेशन के लिए देर से पहुंचते हैं। ऐसा ही कई लोगों के साथ अपनी तय समय पर टेक ऑफ करने वाली फ्लाइट को लेकर भी होता है। बस छूटने पर तो लोग कुछ देर बाद दूसरी बस से निकल जाते हैं। लेकिन कारपोरेट कॉलेज हॉस्पिटल और कई जगह अब नौकरी करने वालों की हाज़िरी डिजिटल सिस्टम से लगती है। लेट जाने पर उस दिन उनकी छुट्टी लग जाती है या फिर काम पर लेने के बाद भी आधे दिन की सैलरी काट ली जाती है। बोर्ड के एक्जाम में भी देर से जाने वालों को पेपर छूटने पर फेल होने सप्लीमेंट्री आने या फिर से परीक्षा देने का खामियाजा भुगतना पड़ता है।
      सवाल यह है इतना बड़ा नुकसान टेंशन और कैरियर को ख़तरा होने के बावजूद बच्चे शिक्षक और नौकरी पेशा लोगों के साथ आम आदमी भी बार बार क्यों लेट होते हैं? हम लोग पहले से गैप लेकर घर से क्यों नहीं निकलते, दूसरों का नुकसान देखकर भी सबक नहीं सीखते और खुद का एक बार कैरियर खराब होने पर भी अगली बार बदलाव नहीं करते। क्या हम लोग नहीं जानते कि घर से देर से या बिल्कुल क्लोज़ टाइम पर निकलने से हम अपनी मंज़िलों पर टाइम पर नहीं पहुंच पाएंगे। ट्रेन कैंसिल या लेट भी हो सकती है। क्या नीट जे ई ई और टेट जैसी परीक्षा हमारी वजह से निर्धारित समय से लेट की जा सकती हैं ? क्या ट्रेन और फ्लाइट किसी व्यक्ति विशेष के कारण देर से चलेंगे? क्या ऑफिस का डिजिटल अटेंडेंस सिस्टम हमारी लेट लतीफी की वजह से हटा दिया जाएगा? नहीं, बिल्कुल नहीं। अगर हम घर से टाइम पर नहीं निकले तो ग़लती किसकी है? अगर हमें टाइम पर रिक्शा नहीं मिली तो कौन जिम्मेदार है? अगर सड़क पर जाम लगा है तो कोई क्या कर सकता है? गलती चाहे सरकार पुलिस और सिस्टम की हो लेकिन ये ऐसे सवाल हैं जिनका हल खुद हमको ही तलाशना है। हल यह है कि हम समय से सोयें, समय पर उठने को एक नहीं दो दो अलार्म लगाएं, समय कम हो तो नाश्ता खाना और नहाना स्किप कर दें, रिक्शा नहीं मिले तो घर के वाहन से स्टेशन पहुंचे, परीक्षा ट्रेन और फ्लाइट के समय से एक दो घंटे पहले पहुंचने का प्लान बनाएं जिससे कुछ लेट भी हो जाएं तो समय पर एंट्री मिल जाए, अगर एक ही बस ट्रेन या फ्लाइट मंज़िल पर जाती हो तो एक दिन पहले पहुंच जाएं और किसी रिश्तेदार जान पहचान वाले या होटल में कमरा लेकर नाइट स्टे भी कर सकते हैं लेकिन देर से जाने का कोई बहाना नहीं चलेगा।

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