Tuesday, 7 July 2026

सिया केतन और चेतन

*आज का विचार... इक़बाल हिंदुस्तानी*
*सिया, यह तू ने क्या कर दिया,*
 *ना नहीं की , मर्डर कर दिया?*
        पुणे की सिया पर आरोप है। उसने अपने मंगेतर केतन का अपने प्रेमी चेतन के साथ मिलकर मर्डर कर दिया। वह साहस करके इस शादी को ना भी बोल सकती थी, लेकिन उसने दुस्साहस दिखाते हुए अपने होने वाले पति को खाई में धक्का दे दिया। हाल ही में इस तरह की और भी घटनाएं सामने आईं हैं। मेघालय में हनीमून के दौरान राजा रघुवंशी को विवाह के चौदह दिन बाद ही उसकी पत्नी ने मार दिया था। दिलीप यादव की सुपारी हत्या का आरोप है। मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ राजपूत का ब्ल्यू ड्रम हत्याकांड पहले ही कुख्यात हो चुका है। सब्ज़ी विक्रेता धन्ना लाल सैनी की हत्या भी मीडिया में सुर्खियां बनी थीं। देहरादून का राजेश गुलाटी हत्या केस लोगों के दिमाग़ में अभी तक ताज़ा है।
        *एक सर्वे एजेंसी के आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं और लड़कियों द्वारा अपने पतियों या प्रेमियों को खुद मार देने या सुपारी किलर से हत्या कराने के सालभर में 300 केस सामने आते हैं तो पतियों या प्रेमियों द्वारा पत्नियों और प्रेमिकाओं को इसी तरह क़त्ल करने के एक साल में 7000 मुकदमे दर्ज होते हैं। इस जानकारी से यह गलतफहमी दूर हो जानी चाहिए कि लेडीज़ या प्रेमिकाएं बड़े पैमाने पर इस तरह की हत्याएं कर या करा रही हैं। सच यह है कि पुरुष प्रधान समाज में आज भी इस तरह के अपराध के मामलों में मर्द औरतों से बहुत आगे हैं।*
         हमारा मकसद यहां हत्यारी महिलाओं प्रेमिकाओं और पत्नियों को क्लीन चिट देना नहीं है, लेकिन इन चंद घटनाओं से यह निष्कर्ष निकालना कि अब महिलाएं पुरुषों की तरह क्रूर और ज़ालिम हो चुकी हैं, थोड़ा जल्दबाजी होगी। कुछ मामलों में प्रेमी प्रेमिकाएं जबरन अनचाहा रिश्ता होने से आत्महत्या भी कर लेते हैं। सिया केतन और चेतन का ही केस गौर से गहराई से और आराम से देखें तो पता चलता है कि सिया अपने माता पिता के असहनीय दबाव में इस अनचाही शादी के लिये ना बोलने का साहस नहीं दिखा पाई और उसने अपने प्रेमी चेतन के साथ मिलकर केतन को कुछ इस तरह ठिकाने लगाने की साज़िश रची जिससे सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे। लेकिन हुआ उल्टा। वह अपने अरबपति परिवार को इस शादी के लिए मना करके इसलिए भी नाराज़ नहीं करना चाहती थी क्योंकि वे उसे ऐसा करने पर अपनी संपत्ति घर और परिवार से अलग करने की चेतावनी दे रहे थे। वे परिवार की साख और सम्मान भी खराब होने की दुहाई दे रहे थे। सिया उनका दिल भी नहीं तोड़ना चाहती थी, लेकिन अपने प्रेमी को भी नहीं छोड़ना चाहती थी। वह भारी द्वंद्व और कशमकश में फंसी हुई थी। हमारा कहना है कि परिवार बच्चों को अच्छी समझ शिक्षा और संस्कृति सिखायें जिससे वे शादी के मामलों में उनकी बात मानें लेकिन अगर वे सहमत नहीं हो पाएं तो बेटे बेटियों को जबरदस्ती जान लेने या जान देने को कभी भी मजबूर नहीं करें।

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