Thursday, 23 April 2026

परिसीमन बिल गिरा

*जिस विपक्ष के आप दुश्मन हैं, वह सरकार को सपोर्ट क्यों करेगा?* 
*-इक़बाल हिंदुस्तानी*        
0 2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार का 131 वां संविधान संशोधन विधेयक पहला बिल है। जो केंद्र सरकार के तमाम दांव पेंच विपक्ष को डराने धमकाने और महिला वोटों के लिये ललचाने के बादवजूद तीन चैथाई बहुमत यानी 528 मंे से 352 की जगह 298 मिलने से हासिल कर पाने से औंधे मुंह गिर गया। मोदी सरकार पहले ही जानती थी कि वह सीएए या अन्य धन विधेयक बताकर विवादित बिलों की तरह राज्यसभा में अल्पमत में होने के बावजूद भी जैसे साम दाम दंड भेद से सामान्य बहुमत का जुगाड़ करके अपने बिल पास कराने में सफल रही है। इस बार ठीक वैसा ही होना मुश्किल नहीं नामुमकिन है। लेकिन उसको इतना भरोसा ज़रूर था कि अगर यह बिल किसी तरह से पास हो गया तो वह महिलाओं को यह कहकर खुश करेगी कि उसने महिलाओं का आरक्षण लागू करने के लिये आवश्यक संसदीय कार्यवाही अंजाम तक पहंुचा दी और अगर ऐसा संभव नहीं हुआ तो वह राजनीतिक लाभ लेने के लिये विपक्ष के खिलाफ विशेष तौर पर बंगाल और तमिलनाडू में यह प्रचार जमकर करेगी कि विपक्ष महिला विरोधी है। लेकिन विपक्षी इंडिया गठबंधन ने जिस राजनीतिक दूरअंदेशी और सूझबूझ से मोदी सरकार की इस चाल को नाकाम करते हुए महिला आरक्षण का समर्थन और संविधान संशोधन विधेयक गिराकर चुनाव क्षेत्रों का नया परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर कराने और लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 कराने का बीजेपी को एक तरफा लाभ पहंुचाने वाला दांव नाकाम किया उससे अब मोदी सरकार काफी सदमें में नज़र आ रही है। हालांकि यह अभी भविष्य के गर्भ में है कि मोदी सरकार इन हालात में 2029 के आम चुनाव में वर्तमान 543 संसदीय सीटों पर 33 प्रतिशत महिला आरक्षण लागू कर पायेगी या नहीं? लेकिन 2023 में 106 वां संविधान संशोधन पास कराने के बाद मोदी सरकार ने जो नारी शक्ति वंदन अधिनियम बनाया था वह 16 अपै्रल की अधिसूचना जारी होने से लागू हो चुका है। इसके साथ ही यह भी देखने वाली बात होगी कि क्या 2029 के आम चुनाव से पहले जनगणना और नया परिसीमन पूरा हो पायेगा? क्योंकि अब तक का कानून यह है कि हर नई जनगणना के बाद संसदीय और राज्यों की विधानसभाओं का नया परिसीमन होना चाहिये। विपक्ष यह भी जानता है कि जिस तरह से बीजेपी सरकार के रहते अब तक असम और कश्मीर में नया परिसीमन इस तरह से किया गया है कि इससे बीजेपी को राजनीतिक लाभ और विपक्ष को नुकसान हुआ है।
        विपक्ष को पूरी आशंका है और सही भी है कि ऐसा ही लोकसभा का नया परिसीमन करने के दौरान किया जायेगा। यह नाराज़गी और डर खासतौर पर दक्षिण के राज्यों तमिलनाडू केरल कर्नाटक और आंध्रा में अधिक देखा जा रहा है। लेकिन आंध्रा में चन्दर बाबू नायडू का गठबंधन एनडीए यानी बीजेपी के साथ होने से वहां इस मुद्दे पर सत्ताधारी राजनेताओं में तो अधिक हलचल नहीं है लेकिन जनता में अन्य दक्षिणी राज्यों की तहर ही बेचैनी और सीटें व राज्य का कोटा घटने की आशंका मौजूद है। हो सकता है नायडू को इसका राजनीतिक नुकसान भी पहुंचे। 1951 में तत्कालीन 489 संसदीय सीटों को बढ़ाकर 494 और 1961 के बाद 522 और अंतिम बार 1971 में 543 नई जनगणना और परिसीमन के बाद किया गया था। इसके बाद यह सवाल उठने लगा कि दक्षिण के जो राज्य देशहित में जनसंख्या नियंत्रण कर परिवार नियोजन कर रहे हैं। अगर उत्तर भारत की तेजी से बढ़ती आबादी के हिसाब से सीटों का परिसीमन कर उनके सांसदों और विधायकों की संख्या बढ़ती है तो इससे एक नया विरोधाभास खड़ा होगा। उत्तर बनाम दक्षिण का विवाद बढ़ता देख तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने संविधान में 42 वां संशोधन कर नये परिसीमन को 2001 तक के लिये रोक दिया था। इसका मकसद देश में परिवार नियोजन को बढ़ावा देना था। सन 2000 में 91 वां संविधान संशोधन कर एनडीए की वाजपेयी सरकार ने इस रोक को आगामी 25 साल और बढ़ाकर नये परिसीमन की मयाद 2026 कर दी। नये परिसीमन पर इस 50 साल की रोक का मकसद जनसंख्या का टीएफआर 2.1 यानि जन्म और मृत्यु दर समानता पर लाकर स्थिर करना था। संविधान सभा की सदस्य रेणुका राय का कहना था कि भविष्य में जब सबको समान अवसर मिलेंगे तो योग्य महिलाएं जनरल सीटों पर ही अपनी भागीदारी खुद बढ़ाती जायेंगी। बदकिस्मती से ऐसा व्यवहारिक रूप से कई दशक तक भी हो नहीं सका। जहां तक इंडिया गठबंधन में शामिल विपक्षी दलों का मोदी सरकार के संविधान संशोधन बिल के विरोध का सवाल है। यह राजनीतिक गुणा भाग से तो स्वाभाविक ही है। मोदी सरकार बनने के बाद से जितना विपक्ष का दानवीकरण किया गया है। इतना देश स्वतंत्र होने के बाद से किसी सरकार ने नहीं किया। कोई दिन ऐसा नहीं जाता जब पीएम मोदी उनकी सरकार में शामिल मंत्री उनके बीजेपी शासित राज्यों की सरकारें पुलिस प्रशासन अन्य जांच एजंसियां और उनका गोदी मीडिया ईडी सीबीआई इनकम टैक्स जीएसटी विभाग विभिन्न आयोग ट्रिब्यूनल यहां तक कि कुछ कोर्ट तक विपक्ष और उसके नेताओं को निशाने पर नहीं लेते हों। यहां तक कि कांग्रेस और सेकुलर दलों को तो देशद्रोही राष्ट्रविरोधी और विदेशी टूलकिट का एजेंट तक बताया जाता है।
         विपक्षी नेताओं पर पूरे देश में जगह जगह ऐसी बातों बयानों और भाषणों के लिये भी एफआईआर दर्ज करा दी जाती हैं जिनका उनसे कोई मतलब वास्ता भी नहीं होता। उनको सोशल मीडिया पर अकसर ट्राॅल किया जाता है। कुछ अंधभक्त तो उनसे नफरत और विरोध में इतना नीचे गिर जाते हैं कि उनको और उनके परिवार महिलाओं और मासूम बच्चों तक पर बेशर्मी से कीचड़ उछालते हैं। उनको संसद में बोलने का अवसर नहीं दिया जाता, बोलने के दौरान उनका माइक बंद कर दिया जाता है, उनको जबरन सदन से बाहर निकाल दिया जाता है, उनके खिलाफ झूठे आरोप लगाकर विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया जाता है, यहां तक कि नेता विपक्ष राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता छीनकर उनका घर रातो रात खाली करा लिया जाता है। ऐसा ही कई अन्य विपक्षी नेताओं महुआ मोइत्रा आादि के साथ समय समय पर अन्याय और पक्षपात किया जाता है। इतना ही नहीं विपक्ष की महाराष्ट्र की तरह कई राज्यों में सरकारें गिराकर बीजेपी अपने या एनडीए गठबंधन के नेतृत्व में जबरन अवैध और असंवैधानिक रूप से सरकार बना लेती है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक ही है कि विपक्ष को सरकार विश्वास में कैसे ले सकती है और 131 वां संविधान संशोधन कैसे पास करा पाती? मोदी सरकार और विपक्ष के बीच न केवल 36 का आंकड़ा है बल्कि भारी अविश्वास और तनाव टकराव हर समय बना रहता है जिसके लिये खुद मोदी सरकार की मनमानी तानाशाह और फासिस्ट तौर तरीकों वाली कार्यशैली उत्तरदायी है। इस लिये नया परिसीमन और संसद की सीटें बढ़ाने वाला बिल बिना विपक्ष के सहयोग के न तो पास होना था और न ही हुआ और भविष्य में इसकी संभावना तब तक नहीं होगी जब तक मोदी सरकार बीजेपी संघ उसके प्रकोष्ठ और उसके वरिष्ठ नेता विपक्ष को टारगेट करना बदनाम करना और पक्षपात पूर्ण एसआईआर के द्वारा चुनाव में लेवल प्लेंयिंग फील्ड खत्म कर वोट चोरी कर चुनाव जीतने का विरोधी दलों का आरोप गलत साबित कर उनसे सौहार्दपूर्ण लोकतांत्रिक समानता और मैत्रीपूर्ण सम्बंध स्थापित कर सही मायने में संवैधानिक परंपराओं निष्पक्षता और सम्मान का परिचय नहीं देती है। एक शेर याद आ रहा है-
 *चाकू की पसलियों से सिफ़ारिश तो देखिये,* 
 *वे चाहते हैं काटने में उनको मदद करे।*

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